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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का सिर्फ 'जन्मदिन' मनाने वाले नेताओं पर तंज, बोले - 'अब पुरानी कांग्रेस नहीं रही..'

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का सिर्फ 'जन्मदिन' मनाने वाले नेताओं पर तंज, बोले - 'अब पुरानी कांग्रेस नहीं रही..'

MP Breaking News 4 months ago

मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर एक नए युग की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने नीमच प्रवास के दौरान एक ऐसा तीखा बयान दिया है, जिसने पार्टी के अंदरूनी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।

जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि अब यह पुरानी कांग्रेस नहीं है, और कुछ नेताओं के लिए सिर्फ 'जन्मदिन मनाने' की राजनीति करने के दिन लद चुके हैं, जिससे राज्य में सियासी माहौल गर्मा गया है।

दरअसल नीमच में एक स्थानीय पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए, जीतू पटवारी ने बिना नाम लिए पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं पर सीधा प्रहार किया। उनके तेवर बेहद आक्रामक और स्पष्ट नजर आए, जिससे यह संदेश साफ चला गया कि अब संगठन में केवल काम करने वाले कार्यकर्ताओं को ही महत्व दिया जाएगा, न कि सिर्फ दिखावटी इवेंट करने वालों को। उन्होंने कड़े संगठनात्मक संकेत दिए हैं, जो आने वाले समय में पार्टी की कार्यप्रणाली में बड़े बदलावों की ओर इशारा करते हैं।

केवल जन्मदिन मनाने वाले नेताओं को चेताया

प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन की मजबूती और मैदानी सक्रियता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो आम दिनों में जनता या कार्यकर्ताओं के बीच से गायब रहते हैं और केवल विशेष अवसरों पर ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। पटवारी ने करारा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी में कुछ नेता ऐसे हैं जो अपने क्षेत्र में केवल 'जन्मदिन मनाने आते हैं'। इस एक वाक्य ने वहां मौजूद पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया, क्योंकि यह सीधा उन कथित 'बड़े चेहरों' पर निशाना था जिनकी जमीनी पकड़ कमजोर हो चुकी है और जो अपनी राजनीति को इवेंट मैनेजमेंट और सोशल मीडिया तक ही सीमित रखते हैं।

दरअसल जीतू पटवारी का यह बयान मात्र एक साधारण टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह इस बात का साफ संकेत है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अब अपनी कार्यशैली में बड़े बदलाव लाने जा रही है। उनके इस संदेश के कई गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं, जो पार्टी के भविष्य की दिशा तय करेंगे। इसका पहला अर्थ यह है कि अब पार्टी में जवाबदेही तय होगी। केवल नाम, पुराने रुतबे या पद के सहारे पद हथियाने वालों की अब खैर नहीं है, उन्हें अपने काम का हिसाब देना होगा और अपनी सक्रियता साबित करनी होगी।

मैदानी कार्यकर्ताओं मिलेगा अधिक महत्व

वहीं दूसरा महत्वपूर्ण संकेत यह है कि मैदानी कार्यकर्ताओं को अब अधिक महत्व मिलेगा। संगठन में उसी को तवज्जो दी जाएगी जो जमीन पर उतरकर जनता के मुद्दों को उठाएगा और सड़क पर संघर्ष करेगा, क्योंकि यही कांग्रेस की मूल पहचान रही है और यही कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगा। तीसरा, वीआईपी कल्चर पर लगाम लगाई जाएगी। 'गेस्ट अपीयरेंस' यानी अतिथि की तरह आकर चले जाने वाले नेताओं को अब हाशिए पर धकेला जा सकता है, क्योंकि पार्टी को ऐसे नेताओं की जरूरत है जो हर समय सक्रिय रहें और जनता के बीच अपनी उपस्थिति बनाए रखें। यह एक तरह से पुराने ढर्रे पर चल रही राजनीति पर सीधा हमला है।

नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: MP Breaking News