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मंदिरों और कहानियां
मंगेशी मंदिर, गोवा

पणजी से तक़रीबन 21 किमी दूर, गोवा के पोंडा तालुका में प्रिओल के मंगेशी गांव में मंगेशी मंदिर स्थित है। इस मंदिर के मुख़्य आराध्य श्री मंगेश हैं जिन्हें 'मंगिरीश' भी कहा जाता है। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है और यहाँ एक शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। श्री मंगेश हिन्दू गौड़ सारस्वत ब्राह्मणों के कुलदेवता हैं।

भगवान मंगेश की उत्पत्ति की कथा
भगवान मंगेश को परम आराध्य भगवान शिव का अवतार माना जाता है और उनकी उत्पत्ति के साथ एक बहुत ही रोचक प्रसंग जुड़ा है।

एक प्रसिद्ध किवदन्ती के अनुसार, एक बार भगवान शिव और देवी पार्वती कैलाश पर्वत पर चौसर खेल रहे थे। शिवजी ने लगातार हारते हुए अंततः आखिरी चाल में स्वर्ग भी दांव पर लगा दिया और उसे भी हार गए। खेल में हार जाने के कारण उन्हें अपना निवास स्थान हिमालय त्यागना पड़ा। उन्होंने दक्षिण की ओर चलना आरम्भ किया और सह्याद्री पर्वत को पार करते हुए कुशास्थली (वर्तमान करतिलम) जा पहुँचे। कुशास्थली में उनके एक अनन्य भक्त लोपेश ने उनसे वहीँ रुकने का अनुनय किया।

तत्पश्चात् देवी पार्वती ने भी स्वर्ग छोड़ दिया और भगवान शिव की तलाश में यहाँ-वहां भटकने लगीं। एक घने जंगल से गुजरते समय अचानक उनके सामने एक बड़ा बाघ आ गया जिसे देखकर वो बहुत घबरा गई और एक मन्त्र का जाप करने लगीं जो शिवजी ने उन्हें अपनी रक्षा करने के लिए सिखाया था। सही मन्त्र था - "हे गिरिशा ममत्राहि" अर्थात् "हे गिरिराज (पर्वतों के स्वामी) मेरी रक्षा करो!", किन्तु पार्वती इतनी ज़्यादा भयभीत थी कि उनका अपनी वाणी पर नियंत्रण न रहा और वह ग़लत मन्त्र - "त्राहि माम गिरिशा" का उच्चारण करने लगीं। और तब, भगवान शिव जिन्होंने स्वयं उस बाघ का रूप धारण किया हुआ था तुरंत अपने वास्तविक रूप में आ गए।

तदुपरांत, देवी पार्वती की आज्ञानुसार, भगवान शिव ने 'मम-गिरिशा' को अपने उन नामों में शामिल कर दिया जिनसे उन्हें जाना और पूजा जाता है। फलतः शिवजी को मम-गिरिशा के संक्षिप्त रूप 'मंगिरीश' और 'मंगेश' नाम से जाना जाने लगा।

मंगेशी मंदिर, गोवा के प्रमुख़ आराध्य श्री मंगेश को विश्व भर के गौड़ सारस्वत ब्राह्मणों द्वारा कुलदेवता के रूप में पूजा जाता है।

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