नागपुर: शहर में छोटे रिहायशी प्रोजेक्ट्स को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) को लेकर नया विवाद सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि कुछ ऐसे प्रोजेक्ट्स, जिन पर मंजूर निर्माण मानकों के उल्लंघन के आरोप हैं, उन्हें ओसी दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि, संबंधित बिल्डर्स संगठनों ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।
सूत्रों के अनुसार, बेसा-पिपला, मनीष नगर और अन्य तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में कई छोटे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में मंजूर एफएसआई, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और अन्य निर्माण नियमों से कथित तौर पर विचलन किया गया है। अब ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट हासिल करने की कोशिशें किए जाने का दावा किया जा रहा है।
नागपुर टुडे से बातचीत में नारेडको के अध्यक्ष कुणाल पडोले ने कहा कि पहले 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट्स के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट अनिवार्य था, जबकि अब सरकार इसे 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट्स पर भी लागू कर रही है।
उन्होंने कहा,
"नारेडको और क्रेडाई दोनों ही ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के पक्ष में हैं। लेकिन इतना बड़ा बदलाव एक दिन में लागू नहीं किया जा सकता। एक दिन में सेल डीड का निष्पादन रोक देना व्यवहारिक समाधान नहीं है।"
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पडोले ने बताया कि दोनों संगठनों ने सरकार से पर्याप्त ट्रांजिशन पीरियड देने की मांग की है, ताकि छोटे प्रोजेक्ट्स के डेवलपर्स नई व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर सकें।
उन्होंने आगे कहा,
"यदि किसी बिल्डर ने स्वीकृत योजना से अधिक निर्माण किया है या मंजूर यूनिट्स से ज्यादा यूनिट्स बनाई हैं, तो हम ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट का समर्थन नहीं करते, चाहे वह हमारा सदस्य ही क्यों न हो। लेकिन यदि मामूली तकनीकी उल्लंघन हैं, तो नियमानुसार शुल्क लेकर उनका समाधान किया जा सकता है। यदि सीधे सेल डीड रोक दी जाए, तो इसका नुकसान खरीदारों सहित सभी हितधारकों को होगा।"
नागपुर टुडे से बातचीत में क्रेडाई नागपुर के अध्यक्ष राजमोहन साहू ने कहा कि संगठन किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट का समर्थन नहीं करता जिसने मंजूर एफएसआई, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान या अन्य निर्माण नियमों का उल्लंघन किया हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रेडाई केवल नियमों का पालन करने वाले प्रोजेक्ट्स के पक्ष में है और किसी भी गंभीर निर्माण उल्लंघन का समर्थन नहीं करता।
दूसरी ओर, सूत्रों का दावा है कि बेसा-पिपला, मनीष नगर और शहर के अन्य इलाकों में कुछ छोटे प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जिनमें मंजूर मानकों से अधिक निर्माण किया गया है और अब उन्हें ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सूत्र यह भी आरोप लगा रहे हैं कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को बिल्डर्स संगठनों का समर्थन मिल रहा है। हालांकि, नारेडको और क्रेडाई दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
पूरा विवाद अब इस बात पर आकर टिक गया है कि छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए नए ओसी नियम लागू करते समय खरीदारों के हित, निर्माण नियमों का सख्ती से पालन और व्यावहारिक समाधान-इन तीनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? क्या नियमों से समझौता होगा या जवाबदेही तय होगी? यही सवाल अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
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