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जहां आते थे प्रधानमंत्री, वहां भी अभी तक रामलीला की नहीं मिली अनुमति

नई दिल्ली, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। कोरोना संक्रमण के कारण जहां एक ओर पूरे देश भर में स्कूल कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद है। वहीं कोरोना संक्रमण का असर अब रामलीला जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी पड़ने लगा है। लाल किला मैदान पर होने वाली ऐसी रामलीलाएं जिनमें स्वयं प्रधानमंत्री भी शामिल होते रहे हैं, उन्हें भी इस साल अभी तक रामलीला की अनुमति नहीं मिली है।
लाल किला मैदान पर होने वाली देश की सबसे बड़ी रामलीला में से एक, लव कुश रामलीला के सचिव अर्जुन कुमार ने कहा, रामलीला तो आयोजित की जानी है। अभी हमें दिल्ली पुलिस से एनओसी नहीं मिली है। जमीन की मंजूरी भी अभी तक नहीं मिल सकी है। लाल किला का यह मैदान आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अंतर्गत आता है। इस भूमि पर रामलीला करने के लिए हम जल्द ही संस्कृति मंत्री एवं मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

इसके साथ ही दिल्ली में होने वाली कई बड़ी रामलीलाओं के पदाधिकारी गृह मंत्रालय एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क कर रहे हैं।

अर्जुन कुमार ने कहा, मौजूदा नियम के तहत केवल 100 व्यक्ति ही ऐसे किसी कार्यक्रम में एकत्रित हो सकते हैं। हम केंद्र सरकार से इसमें कुछ और छूट की अपील करेंगे इसके साथ ही रामलीला के आयोजन के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

लाल किला पर होने वाली लव कुश रामलीला के उपाध्यक्ष गौरव सूरी ने रामलीला की तैयारियों को लेकर कहा, हम चाहते हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कुछ और अधिक लोगों को रामलीला में आने की अनुमति मिल सके। रामलीला में शिरकत करने के लिए केंद्र सरकार जो नियम तय करेगी हम उसका पालन करेंगे। लेकिन हमारी अपील है कि रामलीला में आने के लिए अधिक लोगों को अनुमति दी जाए। बीते वर्षो के दौरान सामान्य दिनों में कई बार एक लाख के आसपास लोग रामलीला में पहुंचते थे। कोरोना को देखते हुए लोगों की इतनी बड़ी भीड़ जुटाना सही नहीं है। हमें कम से कम 5 हजार लोगों की अनुमति मिले। यदि ऐसी अनुमति मिलती है तो हम सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूरी व्यवस्था करने में सक्षम रहेंगे।

गौरतलब है कि दिल्ली की अधिकांश बड़ी रामलीलाओं की तैयारी 3 महीना पहले ही शुरू कर दी जाती है। इन रामलीला में भव्य स्टेज, आकर्षक गेट, खाने-पीने के सैकड़ों स्टॉल और मनोरंजन के लिए झूले इत्यादि की व्यापक व्यवस्था होती है।

-आईएएनएस

जीसीबी-एसकेपी

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