Pradosh Vrat Deepak:देवअधिदेव की कृपा पाने के लिए हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को सबसे शुभ दिन माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस दिन भक्ति भाव से प्रदोष व्रत रखते हैं और उनके जीवन से दरिद्रता, रोग-दोष का नाश होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,प्रदोष व्रत में सुबह की पूजा जितनी महत्वपूर्ण होती है, उससे कहीं अधिक महत्व प्रदोष काल यानी शाम का समय की पूजा का होता है।
प्रदोष काल में दीपक जलाने का महत्व
धर्म शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में घी का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय एक दीपक भी सच्चे मन से जलाने पर भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों के सभी संकट हर लेते है।
प्रदोष व्रत की शाम बस जला दें यहां एक दीपक
शिवलिंग के सामने
ज्योतिषयों के अनुसार, शिवलिंग के सामने घी का दीपक जलाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह उपाय जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
घर के मंदिर में
घर के पूजा स्थल में दीपक जलाने से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
पीपल के पेड़ के नीचे
यदि संभव हो तो शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष और शनि दोष में राहत मिलती है।
मुख्य द्वार पर दीपक
घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं और लक्ष्मी का आगमन होता है।
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कैसे करें प्रदोष व्रत की पूजा
- प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें।
- फिर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद पूजा स्थान को साफ-सुथरा कर भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
- फिर शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा करें और बेलपत्र, पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें।
इसके पश्चात प्रदोष व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। - अंत में आरती कर शिव चालीसा पढ़ें और श्रद्धापूर्वक व्रत का पारण करें।
भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ समय
भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल माना जाता है। आज प्रदोष काल का समय शाम 6:30 बजे से रात 8:54 बजे तक रहेगा। बताया जाता है कि इसी समय भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

