CJI Surya Kant: कोर्ट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल आम तौर पर अच्छा नहीं माना जाता। भारत के मुख्य न्यायाधिश (CJI) सूर्यकांत सोमवार को कोर्ट में अपना मोबाइल फोन लेकर पहुंचे। चीफ जस्टिस ने इसका जिक्र करते हुए खुद कहा कि उनकी जिंदगी में ऐसा पहली बार हुआ है कि उन्हें अपने साथ मोबाइल लेकर अदालत में आना पड़ा है।
सीजेआई ने बताया कि उन्हें एसआईआर प्रक्रिया के सिलसिले में कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कुछ मैसेजों को पढ़ना था। अपने मोबाइल नंबर पर भेजे गए मैसेज को पढ़ते हुए मुख्य न्यायाधीश ने मुस्कुराते हुए कहा कि दरअसल, मुझे अभी याद आया कि मैं पहली बार अदालत में मोबाइल फोन ला रहा हूं। मैं अपने जीवन में कभी नहीं लाया। सुनवाई जारी रहने पर उपस्थित वकीलों ने मुस्कुरा दिया।
मुख्य सचिव और डीजीपी को फटकार
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को निर्देश दिया कि वह पिछले हफ्ते एसआईआर ड्यूटी के दौरान पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक गांव में न्यायिक अधिकारियों के बंधक बनाने से संबंधित घटनाओं की जांच अपने हाथ में ले ले। न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को भी फटकार लगाई, क्योंकि न्यायिक अधिकारियों के घेराव के दौरान उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अपील का जवाब नहीं दिया था।
मुख्य न्यायाधीश (CJI Surya Kant) ने सख्त लहजे में कहा कि आप इतने व्यस्त हैं कि आप हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन भी नहीं उठा सकते। मुख्य सचिव ने कहा कि मुझे किसी भी मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं आया था। मैं एक बैठक के लिए दिल्ली आया था। दोपहर 2 बजे से शाम 4:30 बजे तक मैं फ्लाइट में था।
‘अधिकारियों को लाड़-प्यार दिया जा रहा’
मामले की सुनावई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि आपकी और पुलिस की विफलता के कारण ही यह कार्य न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया है। पश्चिम बंगाल की नौकरशाही की साख को कितना नुकसान हो रहा है? कृपया छवि सुधारने में मदद करें। आप हमें विवश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि गृह सचिव से भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। इन अधिकारियों को जिस तरह से लाड़-प्यार दिया जा रहा है, वह वाकई चौंकाने वाला है। कृपया मुख्य न्यायाधीश के समक्ष माफी मांगें और अपने किए की भरपाई करें।
कानून-व्यवस्था पर कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा की घटना से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था अब उनके हाथों में नहीं है और अधिकारियों की सुरक्षा करने में विफल रहने के लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराया।

