Pakistan Economic Crisis Due To Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग ने पहले से ही भुखमरी का सामना कर रहे पाकिस्तान की मुसीबतें बहुत ज्यादा बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक तौर पर यह बात मान ली है कि इस भयानक युद्ध की वजह से उनके देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
देश में महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के सामने अब ईंधन और गैस का बहुत बड़ा संकट आ खड़ा हुआ है। शहबाज शरीफ ने स्पष्ट कहा है कि पिछले दो सालों में इस विदेशी जंग ने पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को बहुत गहरा और खतरनाक झटका दिया है।
तेल आयात बिल में भारी उछाल
पीएम शरीफ ने बताया कि इस युद्ध के कारण पाकिस्तान का तेल आयात बिल अचानक $300 मिलियन से बढ़कर $800 मिलियन हो गया है। इस अप्रत्याशित वृद्धि से देश की कमजोर अर्थव्यवस्था पर बहुत ही भारी और अतिरिक्त दबाव पड़ा है। हालांकि पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह पेट्रोलियम खपत में थोड़ी कमी दर्ज की गई है।
स्थिति से निपटने के प्रयास
एक आधिकारिक बयान के अनुसार शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया है कि एक विशेष टास्क फोर्स रोजाना इस गंभीर स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने माना कि इन मौजूदा चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने के लिए देश में सामूहिक और कड़े प्रयासों की बहुत सख्त जरूरत है। पाकिस्तान सरकार इस संकट और तनाव को कम करने में लगी है।
सीजफायर पर हुई लंबी वार्ता
कैबिनेट मीटिंग में अमेरिका-ईरान वार्ता के बारे में पीएम शहबाज ने बताया कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच पूरे 21 घंटे तक लंबी और अहम बातचीत हुई। इस लंबी बातचीत को एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना गया है।
पाकिस्तान का क्या है हाल
सरकारी दावों के उलट पाकिस्तान की जमीनी सच्चाई और हकीकत बहुत ही ज्यादा डरावनी और चिंताजनक बनी हुई है। देश में ईंधन का भारी संकट आम लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चुका है और हालात पूरी तरह बेकाबू हैं। लोग ईंधन की कमी के कारण अब बहुत ही खतरनाक और जानलेवा कदम उठाने को पूरी तरह मजबूर हैं।
गुब्बारों में भर रहे गैस
कराची के कई हिस्सों से ऐसी खबरें हैं कि वहां गैस की भारी किल्लत के कारण लोग गैस को प्लास्टिक के गुब्बारों में जमा कर रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि पाकिस्तान में ऊर्जा संकट किस खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद आम जनता को कोई भी राहत नहीं मिल पा रही है।

