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Khatu Shyam Puja: खाटू श्याम के पहली बार दर्शन से पहले जान लें ये जरूरी बातें, तभी होंगी मनोकामनाएं पूरी!

Khatu Shyam Puja: खाटू श्याम के पहली बार दर्शन से पहले जान लें ये जरूरी बातें, तभी होंगी मनोकामनाएं पूरी!

Khatu Shyam Temple: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का मंदिर भगवान कृष्ण के कलयुगी अवतार बर्बरीक को समर्पित एक बेहद पवित्र और प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है। यह “हारे का सहारा” के रूप में प्रसिद्ध हैं और यहां दर्शन से बिगड़े काम बनने की मान्यता है।

अगर आप खाटू श्याम जाने का मन बना रहे हैं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि बाबा की यात्रा केवल मुख्य मंदिर के दर्शन मात्र से पूरी नहीं होती।

अपनी यात्रा को सफल और पुण्यदायी बनाने के लिए आपको कुछ विशेष बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। साथ ही आपको मंदिर परिसर में जाते समय प्रशासन द्वारा तय किए गए नियमों का भी पालन करना चाहिए, ताकि आपको दर्शन में किसी तरह की असुविधा न हो।

किन स्थानों के दर्शन के बिना अधूरी है खाटू श्याम यात्रा?

जानकारों के अनुसार, अगर आप खाटू श्यामजी (Khatu Shyam)के दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो यात्रा को और भी खास बनाने के लिए रींगस से 'निशान यात्रा' शुरू करना बहुत शुभ माना जाता है। रींगस, खाटू श्याम मंदिर से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित है।

परंपरा के अनुसार, भक्त यहां से बाबा का पवित्र 'निशान' (ध्वजा) उठाकर पैदल चलते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं। यह यात्रा भक्ति और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से निशान चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं और बाबा श्याम उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं।

इसके साथ ही मुख्य मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर ‘श्याम कुंड’ भी स्थित है। माना जाता है कि इसी जगह पर वीर बर्बरीक (खाटू श्याम जी) ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने शीश का दान दिया था। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस कुंड का जल कभी नहीं सूखता और इसका सीधा संबंध पाताल लोक से है।

दर्शन के लिए कौन-सा दिन है सबसे शुभ?

खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए सबसे शुभ दिन एकादशी और द्वादशी की तिथि को बताया गया है। इसके साथ ही, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी आमलकी एकादशी को खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए एक महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है।

क्योंकि यह तिथि खाटू श्याम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन पर यहां बहुत बड़ा मेला भी लगता है, जिसे फाल्गुन मेला कहते हैं। कुछ भक्त कार्तिक माह में आने वाली एकादशी को भी बाबा श्याम का प्राकट्य दिवस के रूप में मानते हैं। इस दिन भी दर्शन का विशेष महत्व माना गया है।

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बाबा श्याम को क्या-क्या अर्पित करें?

अगर आप बाबा के दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो उनकी प्रिय चीजें जैसे गुलाब का फूल, मोरपंख और इत्र उन्हें अर्पित कर सकते हैं। साथ ही भोग के रूप में आप खाटू श्याम जी को गाय के दूध से बनी मिठाइ, खीर या फिर चूरमे का भोग लगा सकते हैं।

इसके अलावा नारियल भी चढ़ाया जाता है। बाबा श्याम को भोग लगाने के बाद आप प्रसाद के रूप अन्य लोगों में चूरमा बांट सकते हैं, जो बहुत फलदायी माना जाता है।

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