Motor Vehicles Act India: भारत में ट्रैफिक नियमों को लेकर कई तरह की अफवाहें और गलतफहमियां फैली हुई हैं। इन्हीं में से एक बड़ा सवाल है क्या चप्पल या फ्लिप-फ्लॉप पहनकर कार चलाना गैरकानूनी है?
कई लोग मानते हैं कि ऐसा करने पर ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है, जबकि कुछ इसे महज अफवाह बताते हैं। ऐसे में आम ड्राइवरों के मन में असमंजस बना रहता है।
क्या कहता है कानून?
असलियत यह है कि भारत के Motor Vehicles Act में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि चप्पल पहनकर गाड़ी चलाने पर चालान काटा जा सकता है। यानी आप जूते पहनें या चप्पल, इस आधार पर कोई दंड नहीं लगाया जा सकता। सितंबर 2019 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया था कि ऐसा कोई नियम मौजूद नहीं है। इसके बाद यह भ्रम काफी हद तक दूर हो गया था।
फिर जूते पहनने की सलाह क्यों?
हालांकि कानून चप्पल पहनकर ड्राइविंग की अनुमति देता है, लेकिन सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मानते। जूते पैडल पर बेहतर पकड़ और संतुलन देते हैं। ब्रेक या एक्सिलरेटर दबाते समय जूते का मजबूत सोल सही दबाव बनाए रखने में मदद करता है। वहीं चप्पल या सैंडल फिसल सकती हैं, खिसक सकती हैं या कभी-कभी पैडल में अटक भी सकती हैं। अचानक ब्रेक लगाने जैसी स्थिति में यह छोटी सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है।
क्या हो सकते हैं जोखिम?
- पैडल से पैर फिसलने की संभावना
- अचानक प्रतिक्रिया में देरी
- गीली या फिसलन भरी स्थिति में कंट्रोल कम होना
- लंबे समय तक ड्राइविंग में असुविधा
इन कारणों से विशेषज्ञ मजबूत और फिट जूते पहनकर ड्राइविंग करने की सलाह देते हैं।
सुरक्षित ड्राइविंग का सही तरीका
ड्राइविंग के दौरान आपका पूरा ध्यान सड़क पर होना चाहिए। आरामदायक और मजबूत फुटवियर न केवल आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि इमरजेंसी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने में भी मदद करता है। कानून भले ही चप्पल पर रोक न लगाता हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से जूते ज्यादा सुरक्षित विकल्प साबित होते हैं।
ध्यान दें
अगर आप चप्पल पहनकर गाड़ी चला रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है इस पर कोई चालान नहीं कटेगा। लेकिन अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए सही फुटवियर चुनना ही समझदारी है। याद रखिए, सड़क पर छोटी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

