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Maa Behen Movie Review: रोमांच और सस्पेंस से भरी है माधुरी दीक्षित-तृप्ति डिमरी स्टारर 'मां बहन'

Maa Behen Movie Review: रोमांच और सस्पेंस से भरी है माधुरी दीक्षित-तृप्ति डिमरी स्टारर 'मां बहन'

फिल्म: मां बहन

कास्ट: माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी, रवि किशन, धरना दुर्गा, गीतांजलि कुलकर्णी और अरुणोदय सिंह
निर्देशक: सुरेश त्रिवेणी
रिलीज प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स
जॉनर: ब्लैक कॉमेडी ड्रामा

रेटिंग्स: 3 स्टार्स

Madhuri Dixit Film Maa Behen Review: फिल्म की कहानी रेखा नाम की एक ऐसी महिला की है, जिसके पति के गुजर जाने के बाद उसकी दो बेटियां जया और सुषमा ही उसकी सुख-दुख की साथी है। हालांकि रेखा और उसकी बेटियां अनेकों कारणों के चलते अपनी कॉलोनी में बदनाम हैं। एक तरफ जहां कॉलोनी के कई मर्दों की रेखा पर नजर है, वहीं पूरी कॉलोनी रेखा और उसकी बेटियों को चरित्रहीन मानकर उनसे दूरी बनाई रखती है।

एक दिन रेखा अपनी बेटियों को फोन करके बताती है कि पड़ोस में रहने वाले गुप्ता जी के साथ जानलेवा हादसा हो गया है और क्योंकि ये हादसा रेखा के अपने घर में हुआ है, अब वे उसमें फंस गई हैं। ऐसे में अपनी मां की मदद करने जया और सुषमा अपनी मां के पास पहुंचती हैं और यही से शुरू होती है असली कहानी जहां वे गुप्ता जी के मामले को निपटाने में जुट जाती हैं और इसमें फंसती चली जाती हैं। लेकिन किसी भी अन्य फिल्म की तरह, ये एक हैपी एंडिंग के साथ खत्म होती है।

स्टार कास्ट की अभिनय

काफी समय बाद माधुरी दीक्षित को पर्दे पर देखना बेहद रोमांचक रहा। रेखा के किरदार में जहां वे बेहद खूबसूरती का तड़का लगाती दिखी वहीं जया और सुषमा की मां होने की जिम्मेदारी को भी वो बढ़िया ढंग से निभाती नजर आई। वहीं फिल्म में तृप्ति ने जया के किरदार में हमें बेहद इम्प्रेस किया। मां बहन में उनकी एनर्जी उनकी सूझबूझ बेहद लाजवाब है और वे अपने किरदार से पूर्ण रूप से न्याय करती नजर आई। बात करें रवि किशन की तो भले ही उनका स्क्रीन टाइम सीमित है, लेकिन गुप्ता जी के अपने किरदार में वे पूरी तरह से ढले हुए नजर आए। इसी के साथ सुषमा के रोल में धरना ने भी बढ़िया परफॉर्म किया है।

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फिल्म का फाइनल टेक

सुरेश त्रिवेणी द्वारा निर्देशित ये डार्क फिल्म कॉमेडी अपनी कास्ट की परफॉर्मेंस के चलते एंटरटेनिंग साबित होती है। हालांकि फिल्म को देखने के बाद एहसास होता है कि इसकी कहानी को और बढ़िया और सटीक ढंग से बनाया जा सकता है। फिल्म का कॉन्सेप्ट जहां बढ़िया है वहीं इसकी स्क्रीनप्ले थोड़ी धीमी जरूर है जिसके चलते कुछ जगहों पर ये हमारा अटेंशन बनाए रखने में नाकामयाब होती है। फिल्म में कॉमेडी और क्राइम का तड़का है जो ऑडियंस को सोचने पर मजबूर करती है। हालांकि इसकी कहानी जिस तरह से आगे बढ़ती है ये कुछ जगहों पर मन में कई सवाल भी खड़े करती है।

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