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Meghna Gulzar Birthday: कल्पना हो या सच्ची घटना, मेघना गुलजार की हर फिल्म छोड़ जाती है गहरी छाप

Meghna Gulzar Birthday: कल्पना हो या सच्ची घटना, मेघना गुलजार की हर फिल्म छोड़ जाती है गहरी छाप

नवभारत 6 months ago

Meghna Gulzar Direction Style: बॉलीवुड निर्देशक मेघना गुलजार की फिल्मों में अक्सर रिसर्च की गहराई, संवेदनशीलता और असलियत की चमक दिखाई देती है। मेघना किसी भी कहानी पर काम शुरू करने से पहले महीनों तक रिसर्च करती हैं, किरदारों के मनोविज्ञान को समझती हैं और हर सीन को वास्तविकता के करीब लाने का प्रयास करती हैं।

यही वजह है कि उनकी कहानियां विश्वसनीय और प्रभावशाली बनती हैं।

13 दिसंबर 1973 को मुंबई में जन्मीं मेघना, मशहूर गीतकार-निर्देशक गुलजार और एक्ट्रेस राखी की बेटी हैं। बचपन से ही उन्होंने पिता की साहित्यिक और क्रिएटिव दुनिया को करीब से देखा, जिसने उनके सोचने और लिखने की शैली पर गहरा प्रभाव डाला। भले ही उनके माता-पिता का रिश्ता उनके जन्म के कुछ समय बाद बदल गया, लेकिन मेघना और गुलजार के बीच हमेशा एक मजबूत और खूबसूरत रिश्ता बना रहा।

मेघना गुलजार का करियर

मेघना ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। एक अंग्रेजी अखबार में फ्रीलांस लेखन करते हुए उनकी रुचि फिल्मों की तरफ बढ़ी। बाद में उन्होंने निर्देशक सईद मिर्जा के साथ असिस्टेंट के रूप में काम किया और न्यूयॉर्क जाकर फिल्ममेकिंग की आधुनिक तकनीकों को सीखा। 2002 में आई उनकी पहली फिल्म 'फिलहाल…' भले ही बॉक्स ऑफिस पर सफल न रही हो, लेकिन इसने मेघना को दर्शकों की पसंद और फिल्म निर्माण की चुनौतियों को समझने में मदद की।

इस फिल्म से मिली पहचान

मेघना को असली पहचान 2015 की 'तलवार' से मिली, जो आरुषि तलवार मर्डर केस पर आधारित थी। इस फिल्म के लिए मेघना ने विस्तृत रिसर्च की, केस फाइलों से लेकर मनोवैज्ञानिक पहलुओं तक हर हिस्से को गहराई से समझा। 2018 में आई 'राज़ी' ने मेघना को मजबूत कहानीकार के रूप में स्थापित किया। आलिया भट्ट द्वारा निभाया गया जासूस सेहमत का किरदार इतनी वास्तविकता के साथ पेश किया गया कि फिल्म दर्शकों के दिलों में बस गई।

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मेघना गुलजार की फिल्में

इसके बाद 'छपाक' और 'सैम बहादुर' ने भी साबित कर दिया कि मेघना का सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनाओं और सच्चाई की परतों से बना होता है। आज मेघना गुलजार उन चुनिंदा निर्देशकों में हैं, जो हर फिल्म के साथ समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं। उनकी रिसर्च-आधारित फिल्में बॉलीवुड में एक अलग और मजबूत पहचान कायम कर चुकी हैं।

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