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मीरा-भाईंदर मनपा की सुरक्षा फिर निजी हाथों में! 333 MSF गार्ड हटेंगे, ठाणे में निजी एजेंसी को मिलेगा जिम्मा

मीरा-भाईंदर मनपा की सुरक्षा फिर निजी हाथों में! 333 MSF गार्ड हटेंगे, ठाणे में निजी एजेंसी को मिलेगा जिम्मा

नवभारत 1 month ago

Security To Return To Private Guards: मीरा- भाईंदर मनपा की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर निजी हाथों में जाने वाली है। हाल ही में हुई महासभा में राज्य सुरक्षा महामंडल (एमएसएफ) के 442 सुरक्षा कर्मियों में से 333 की संख्या घटाकर उनकी जगह निजी सुरक्षा एजेंसी के गार्ड नियुक्त करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था।

शेष 89 एमएसएफ कर्मी मनपा की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहेंगे। सत्तापक्ष भाजपा और विपक्ष कांग्रेस - शिवसेना के पार्षदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था।

एमएसएफ को सौंपी गई थी सुरक्षा

मनपा के कार्यालयों, सभागृहों, उद्यानों और अन्य महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2023 में एमएसएफ के 442 और सुरक्षा गार्ड बोर्ड के 51 कर्मियों की नियुक्ति की गई थी।

इससे पहले निजी सुरक्षा गार्डों के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद उनकी सेवाएं बंद कर एमएसएफ को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय महासभा में एमएसएफ से सुरक्षा सेवा लेने का भी विरोध हुआ था।

एमएसएफ गार्डों की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

अब एमएसएफ कर्मियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी महासभा में सवाल उठे। सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षद भगवती शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ एमएसएफ गार्ड ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं।

विरोध प्रदर्शन और रैलियों के दौरान भी उनके प्रभावी तरीके से स्थिति संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया गया। इससे मनपा के कामकाज में बाधा आने की बात कही गई।

333 कर्मी कम होंगे, निजी एजेंसी के लिए निकलेगा टेंडर

इन शिकायतों और आरोपों के बीच महासभा ने 333 एमएसएफ कर्मियों को कम कर उनके स्थान पर निजी सुरक्षा गार्ड नियुक्त करने को मंजूरी दी है। इसके लिए आवश्यक वित्तीय खर्च को भी प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। अब मनपा प्रशासन निविदा प्रक्रिया के जरिए निजी सुरक्षा एजेंसी नियुक्त करेगा।

फैसले पर नागरिकों ने उठाए सवाल

निजी सुरक्षा गार्डों के खिलाफ पहले गंभीर शिकायतों के चलते उनकी सेवाएं बंद की गई थीं। ऐसे में अब एमएसएफ कर्मियों की संख्या घटाकर निजी गार्डों को दोबारा सुरक्षा व्यवस्था में लाने के फैसले पर जागरूक नागरिकों ने सवाल उठाए हैं।

नागरिकों का कहना है कि हवाई अड्डों, ठाणे के मेट्रो स्टेशनों, पुलिस कार्यालयों, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों, बड़े सरकारी अस्पतालों, सरकारी बैंकों और ताप विद्युत संयंत्रों जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर एमएसएफ कर्मियों की तैनाती होती है।

ऐसे में मनपा की सुरक्षा में एमएसएफ की संख्या कम करने का फैसला कितना उचित है, यह सवाल उठ रहा है। नागरिकों का यह भी आरोप है कि पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए मनपा ने यू टर्न लिए है।

तीन सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच समन्वय बनेगा चुनौती

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ठाणे मनपा की सुरक्षा में एमएसएफ, सुरक्षा गार्ड बोर्ड और निजी सुरक्षा एजेंसी से जुड़े कर्मियों की मौजूदगी रहेगी। ऐसे में अलग-अलग सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण प्रशासन के लिए चुनौती होगा।

यदि जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं की गईं, तो इससे सुरक्षा प्रबंधन के साथ-साथ किसी घटना की स्थिति में जवाबदेही भी प्रभावित हो सकती है।

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