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मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली भूपति निभाऐंगे बड़ी जिम्मेदारी, गोंडवाना विश्वविद्यालय ने बनाया समन्वयक

मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली भूपति निभाऐंगे बड़ी जिम्मेदारी, गोंडवाना विश्वविद्यालय ने बनाया समन्वयक

Gondwana University Gadchiroli: कभी हाथों में बंदूक लेकर जंगलों में सक्रिय रहनेवाले हाथ अब आदिवासी ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़े दस्तावेज संभालेंगे। नक्सली आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने हथियारों का रास्ता छोड़ने के बाद अपने जीवन की नई दिशा तय की है।

गोंडवाना विश्वविद्यालय ने उन्हें 'एकल' उपक्रम में समन्वयक नियुक्त किया है। अब वह ग्रामसभाओं और आदिवासी समुदायों को उनके कानूनी अधिकारों के संबंध में मार्गदर्शन करेंगे। भूपति ने अक्टूबर 2025 में गड़चिरोली में अपने 61 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था।

कई वर्षों तक जंगलों में नक्सली आंदोलन में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। अब उसी आदिवासी क्षेत्र में, जहां वह कभी अलग भूमिका में सक्रिय थे, वहां नागरिकों को उनके अधिकार कानूनी तरीके से दिलाने के लिए कामा करेंगे। गड़चिरोली के पुलिस अधीक्षक एम रमेश ने आदिवासी समाज के मुद्दों की भूपति को अच्छी समझ और क्षेत्र में उनके प्रत्यक्ष अनुभव को देखते हुए उनका नाम गोंडवाना विश्वविद्यालय के समक्ष सुझाया था।

आदिवासी अधिकारों पर करेंगे काम

इसके बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें 'एकल' उपक्रम में समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी नियुक्ति तीन महीने के अनुबंध पर की गई है। उन्हें प्रतिमाह 30 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। भूपति ग्रामसभा, ग्रामीणों और प्रशासन के बीच समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। आदिवासी समुदाय से जुड़े कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और ग्रामसभा की भूमिका के बारे में ग्रामीणों को मार्गदर्शन देना उनके कार्य का प्रमुख हिस्सा होगा। विशेष रूप से वन एवं भूमि अधिकारों सहित विभिन्न कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने में वे ग्रामसभाओं की मदद करेंगे।

532 ग्रामसभाओं का हो चुका सशक्तिकरण

गोंडवाना विश्वविद्यालय के 'एकल' उपक्रम के तहत अब तक जिले की कुल 1,149 ग्रामसभाओं में से 532 ग्रामसभाओं का सशक्तीकरण किया जा चुका है। ऐसे में भूपति की नियुक्ति को इस अभियान को जमीनी स्तर पर गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बंदूक के रास्ते से लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्यधारा में लौटे भूपति के लिए यह नियुक्ति महज रोजगार का अवसर नहीं है। यह उनके अतीत से वर्तमान की ओर बढ़ते हुए संघर्ष से समाजसेवा की राह पर शरू हुई एक नई यात्रा भी है

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