Worker Death Case Maharashtra: नागपुर महाराष्ट्र को झकझोर देने वाले राऊलगांव स्थित ‘एसबीएल एनर्जी’ कम्पनी में हुए विस्फोट मामले में बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने शनिवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
26 निर्दोष मजदूरों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराए गए कम्पनी के 6 बड़े अधिकारियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से न्यायालय ने स्पष्ट इनकार कर दिया और उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
9 मार्च को हुए इस विस्फोट में 22 महिला और 4 पुरुष कामगारों की दर्दनाक मौत हो गई थी। 9 कामगार अभी भी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं, जबकि 7 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
सत्र न्यायालय का फैसला बरकरार न्यायमूर्ति महेंद्र नेरलीकर की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, जानमाल की बड़ी हानि और कम्पनी प्रशासन की लापरवाही को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा।
आरोपियों में कम्पनी संचालक रवि कामरा, संचालक राकेश तिवारी, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर राजवाड, वरिष्ठ महाप्रबंधक संदीप सोलंकी, महाप्रबंधक प्रदीप शर्मा और पर्यवेक्षक विलास मालवे शामिल हैं।
इन सभी पदाधिकारियों ने सत्र न्यायालय द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
जांच एजेंसी पर सवाल, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन
कलमेश्वर पुलिस ने इस मामले में 32 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीपनएस) की धारा 105 ( सदोष मनुष्यवध), 125 (अ) व (ब) और 288 के तहत मामला दर्ज किया है।
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जांच के दौरान कई चौकाने वाली बाते सामने आई ‘पेट्रोलियम एड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन’ (पेसो) और ‘औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संचालनालय की रिपोर्ट के अनुसार, कम्पनी ने विस्फोटक निर्माण के नियमों का गंभीर उल्लघन किया था। प्रारंभिक आरोप के अनुसार, संचालकों से लेकर महाप्रबंधकों तक सभी को सुरक्षा में खामियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया।

