Tulsi Gabbard Trump Dispute: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, तुलसी गचार्ड ने अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया। वह खुफिया विभाग की प्रमुख थीं जैसे हमारे यहां राष्ट्रीय सुरक्षा सालाहकार अजीत डोभाल हैं।’
हमने कहा, ‘तुलसी ने ठीक ही किया। वह प्रेसिडेंट ट्रंप को नीतियों का लगातार विरोध कर रही थीं। ट्रंप ने वेनेजुएला में सत्ता पलटी और वहां के राष्ट्रपति मादुरी को न्यूयार्क की जेल में कैद किया, ईरान में भी सत्ता पलट के इरादे से हमला किया। तुलसी को डोनाल्ड ट्रंप का यह रवैया नापसंद था। इसलिए कहा गया है- दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना, जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना। घुट-घुट कर जीने को बजाय इस्तीफा देना सबसे अच्छा। तुलसी गबार्ड ईसाई धर्म नहीं मानतीं। वह स्वघोषित हिंदू हैं और भारत व भारतीयता से प्रेम रखती हैं।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, अमेरिका की आबोहवा में तुलसी का पौधा टिक नहीं पाता। वहां सितंबर से फरवरी तक कड़ाके की ठंड पड़ती है और बर्फ गिरता है। उस देश का मौसम तुलसी के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं है। भारत में हर हिंदू के घर में तुलसी का पौधा पाया जाता है। उसकी पूजा की जाती है और कार्तिक माह की एकादशी को तुलसी विवाह मनाया जाता है। तुलसी-अदरक की चाय पीने से सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है। तुलसी की पत्ती डाले बिना भगवान को नैवेद्य अर्पण नहीं किया जाता। पुराने घरों के आंगन में तुलसी वृंदावन बनाया जाता था, जिससे घर में सुख-सौभाग्य बना रहता था। अब फ्लैट व अपार्टमेंट में यह संभव नहीं है। तुलसी की महत्ता की वजह से अपने देश में तुलसीदास व तुलसीराम नाम पड़े। किसी महिला का नाम तुलसाबाई भी हो सकता है। पुराण कथा है कि एक बार भगवान कृष्ण को तुला में विठाकर उन्हें भरपूर सोने-चांदी से तौला गया लेकिन भगवान का पल्ला जरा भी ऊपर नहीं उठा। जब सोने-चांदी वाले पल्ले में तुलसी पत्र रखा गया तो पल्ला तुरंत उठ गया। भगवान को तुलसी अत्यंत प्रिय हैं। शालिग्राम की पूजा में तुलसी अनिवार्य है।’
हमने कहा, ‘फिलहाल ट्रंप से तुलसी गबार्ड दूर जा चुकी हैं। अब वह कभी नहीं कहेंगी मैं तुलसी तेरे आंगन की।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

