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Neelam Shinde: 392 दिनों तक मौत से लड़ी महाराष्ट्र की बेटी; अमेरिका में निधन के बाद परिवार ने पेश की मिसाल

Neelam Shinde: 392 दिनों तक मौत से लड़ी महाराष्ट्र की बेटी; अमेरिका में निधन के बाद परिवार ने पेश की मिसाल

Neelam Shinde Death USA: महाराष्ट्र के सतारा जिले की एक होनहार बेटी, नीलम तानाजी शिंदे, ने मौत के साथ 1 साल और 27 दिनों तक चले लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार अंतिम सांस ली। 14 फरवरी, 2025 को अमेरिका के सैक्रामेंटो में हुए एक भयानक सड़क हादसे का शिकार हुईं नीलम 28 मार्च, 2026 को जिंदगी की जंग हार गईं।

उनके निधन की खबर से उनके पैतृक गांव उमराज वडगांव (कराड) सहित पूरे सतारा जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।

नीलम उच्च शिक्षा का सपना लेकर अमेरिका गई थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कैलिफोर्निया में पैदल चलते समय एक अनियंत्रित वाहन ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी थी, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और वे कोमा में चली गई थीं।

13 महीनों का कठिन संघर्ष और सरकारी मदद

दुर्घटना के बाद नीलम को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके सिर में फ्रैक्चर और हाथ-पैर टूटने के कारण स्थिति अत्यंत नाजुक थी। नीलम के पिता तानाजी शिंदे और मामा संजय कदम ने उनके पास पहुँचने के लिए वीजा के लिए लंबा संघर्ष किया। परिवार की व्यथा को देखते हुए भारत सरकार ने हस्तक्षेप किया और अमेरिकी दूतावास से अनुरोध कर उन्हें तत्काल वीजा दिलवाया। परिवार पिछले कई महीनों से अस्पताल में नीलम के ठीक होने की प्रार्थना कर रहा था, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ।

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अंगदान का प्रेरणादायक निर्णय

दुख की इस घड़ी में भी नीलम के परिवार ने एक अत्यंत साहसी और मानवीय निर्णय लिया है। नीलम की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने उनके अंग दान (Organ Donation) करने का फैसला किया। इसी निर्णय के तहत उनकी आंखें और त्वचा दान कर दी गई हैं, जिससे अन्य जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा। शोक संतप्त परिवार का मानना है कि अंगदान के जरिए नीलम दूसरों के रूप में जीवित रहेगी।

अमेरिका में होगा अंतिम संस्कार

नीलम तानाजी शिंदे का अंतिम संस्कार कल, 7 अप्रैल 2026 को दोपहर 1 बजे (अमेरिकी समयानुसार) माउंट वर्नोन मेमोरियल पार्क में किया गया। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और खाड़ी युद्ध के चलते उत्पन्न यात्रा प्रतिबंधों के कारण नीलम के पिता और परिवार के अन्य सदस्य अमेरिका में उपस्थित नहीं हो सके। उनकी अनुपस्थिति में अमेरिका में रहने वाली नीलम की मौसी ने सभी अंतिम रस्मों को पूरा किया। नीलम का यह बलिदान और उनके परिवार का अंगदान का फैसला समाज के लिए एक अमिट संदेश छोड़ गया है।

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