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प्रधान बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों को झटका! अब 2027 में बजेगी चुनावी डुगडुगी? जानिए किसे होगा बड़ा नुकसान

प्रधान बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों को झटका! अब 2027 में बजेगी चुनावी डुगडुगी? जानिए किसे होगा बड़ा नुकसान

नवभारत 3 months ago

UP Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश में साल 2026 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल तक टल सकते हैं। अगले साल ही यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं, और राज्य में कमीशन की कमी और अधूरी रिजर्वेशन प्रोसेस की वजह से ऐसी अटकलें हैं कि पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव एक साथ या महीने भर से कम अंतराल पर हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में तेजी से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही थीं और उम्मीद जताई जा रही थी कि अगले कुछ महीनों में चुनाव हो जाएंगे, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस प्रोसेस पर ब्रेक लगा दिया है। जिससे उम्मीदवारों और लोकल नेताओं में कन्फ्यूजन है।

पंचायत चुनाव में क्यों हो रही है देरी?

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी का मुख्य कारण पिछड़ा वर्ग कमीशन का न बनना है। कमीशन का टर्म अक्टूबर 2025 में खत्म हो रहा था और नियमों के मुताबिक हर तीन साल में इसका रीकंस्ट्रक्शन जरूरी है। रिज़र्वेशन तय करने का काम कमीशन की रिपोर्ट पर आधारित होता है।

यूपी में कब तक होंगे पंचयात चुनाव?

इलाहाबाद हाई कोर्ट में फाइल की गई एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने कमीशन बनाने का भरोसा देते हुए हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने कहा है कि कमीशन बनाकर एक रैपिड सर्वे किया जाएगा। हालांकि कमीशन बनने, सर्वे होने और रिजर्वेशन प्रोसेस में छह महीने लग सकते हैं। इसलिए डेडलाइन अपने आप आगे बढ़ती दिख रही है।

जोखिम भरी होगी पंचायत चुनाव में देरी!

राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव कराना किसी भी पार्टी के लिए रिस्की हो सकता है। पंचायत लेवल पर गुटबाजी और अंदरूनी झगड़े बड़े इलेक्शन पर असर डाल सकते हैं। कुछ राजनैतिक पंडित इसे संगठन स्तर पर नाराजगी कम करने की रणनीति मान रहे हैं, लेकिन सरकार ने इसे कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी देरी बताया है।

सपा में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी

दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी के पुराने नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। मूल रूप से बांदा के रहने वाले सिद्दीकी का असर बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है। उनका एक मज़बूत सपोर्ट बेस हो सकता है। वह अपने परिवार और करीबियों के लिए सीटों का पक्का भरोसा चाहते हैं।

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एक और बड़ा नाम पीलीभीत के नेता अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू का है। बीसलपुर सीट से कई बार MLA रहे फूल बाबू का अपने इलाके में एक मजबूत पर्सनल वोट बैंक माना जाता है। पीलीभीत क्षेत्र में जहां समाजवादी पार्टी तुलनात्मक रूप से कमजोर रही है। ऐसे में फूल बाबू के आने से संगठन मजबूत हो सकता है।

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