Latest RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक बुधवार से शुरू हो गई है। इस बैठक में देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर गहराई से चर्चा की जाएगी।
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने आर्थिक स्थिति को काफी जटिल बना दिया है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार RBI ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला ले सकता है, लेकिन उसका रुख सतर्क रहेगा। वैश्विक चुनौतियों के कारण केंद्रीय बैंक अपनी नीतियों में थोड़ी सख्ती बनाए रख सकता है। एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के मुताबिक भविष्य में जरूरत पड़ने पर कुछ सख्ती की जा सकती है। फिलहाल बाजार यह मानकर चल रहा है कि साल 2026 की चौथी तिमाही से ही ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है।
कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव और आर्थिक विकास दर एवं महंगाई का अनुमान
प्रांजुल भंडारी ने कहा कि आरबीआई के नए आर्थिक अनुमानों पर बाजार और निवेशकों की खास नजर रहेगी। यह देखना बेहद अहम होगा कि केंद्रीय बैंक ऊर्जा क्षेत्र के झटकों और कच्चे तेल की कीमतों का कैसे आकलन करता है। अगर तेल की कीमत का अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत हो सकता है।
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून की कमी और ईंधन की खुदरा कीमतों से महंगाई तेजी से बढ़ी है। थोक महंगाई में हुई इस वृद्धि का सीधा असर आम आदमी की खुदरा महंगाई पर काफी तेजी से देखने को मिल सकता है। वर्तमान समय में महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण ग्राहकों की मांग नहीं बल्कि आपूर्ति पक्ष की लगातार बनी हुई चुनौतियां हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में देश की अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत के स्तर पर रहने का अनुमान है। इसके लिए यह जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत लंबे समय तक लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे। हालांकि, पश्चिम एशिया में संघर्ष खिंचता है और तेल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो वृद्धि दर 6 प्रतिशत रह सकती है।
वैश्विक अस्थिरता के बीच जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य और वित्तीय विशेषज्ञों की राय
एसबीआई रिसर्च का भी मजबूती से यह मानना है कि महंगाई के खतरे और वैश्विक अस्थिरता के कारण आरबीआई रेपो रेट नहीं बदलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मजबूत जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह वृद्धि दर लगभग 7.5 प्रतिशत आंकी गई है जो एक सकारात्मक संकेत है।
ईंधन की कीमतों के कारण सीपीआई आधारित महंगाई कई तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में ब्याज दरों में यथास्थिति पूरी तरह से बनाए रखने का पुख्ता अनुमान जताया है। इस जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई हालिया नरमी से आरबीआई को काफी हद तक राहत मिली है।
बाहरी आर्थिक स्थिति में आए सुधार ने भी भारतीय रिजर्व बैंक के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है। ब्रोकरेज के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें और कम होती हैं और भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो भारतीय रुपए को मजबूती मिलेगी। इस अनुकूल स्थिति के कारण आरबीआई को लंबे समय तक अपनी प्रमुख ब्याज दरें स्थिर रखने में भी बहुत अधिक मदद मिल सकती है।

