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SBL कंपनी का विस्फोटक नागपुर के रिहायशी इलाके में कैसे आया? PESO और ATS की जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

SBL कंपनी का विस्फोटक नागपुर के रिहायशी इलाके में कैसे आया? PESO और ATS की जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

Nagpur SBL Energy Explosives: नागपुर के दोसर भवन चौक पर मंगलवार को मिले विस्फोटक का मामला और गंभीर होता जा रहा है। रिहायशी इलाके में इस तरह विस्फोटक मिलने से वैसे भी नागिरक दहशत में हैं।

पुलिस ने विस्फोटक का पता लगाने के लिए जांच शुरू की लेकिन इस जांच में और भी बड़ा खुलासा हुआ है। जो विस्फोटक बरामद किए गए उनमें न तो बैच नंबर था और न ही बारकोड।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर विस्फोटक लाने वाले का सुराग कैसे मिलेगा"https://navbharatlive.com/maharashtra/nagpur/nagpur-explosives-conspiracy-dosar-bhawan-chowk-detonators-ammonium-nitrate-1657248.html">विस्फोटक सामग्री को मैग्जीन में सुरक्षित जब्त कर लिया।

SBL एनर्जी कंपनी का एक्सप्लोसिव

शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि विस्फोटक SBL एनर्जी एक्सप्लोसिव कंपनी से निकला था। पुलिस ने SBL से डिस्ट्रिब्यूटरों को भेजे गए स्टॉक की जांच शुरू की। कंपनी से निकलने वाली जिलेटिन की छड़ियों में बारकोड होता है जिससे उसके उत्पादन का पता चलता है।

बारकोड से यह पता लगाया जा सकता है कि आखिर विस्फोटक किसे बेचा गया। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि बरामद की गई जिलेटिन की छड़ियों में बारकोड भी नहीं था। अब लगता है, ये विस्फोटक अवैध तरीके से कंपनी के बाहर निकले हैं।

2 दिन पहले पेसो ने की थी जांच

जानकारी मिली है कि सोमवार को ही पेसो के अधिकारियों ने एसबीएल कंपनी का मुआयना किया था। इसमें कंपनी में पड़े स्टॉक और सप्लाई की गई सामग्री की भी जांच की गई। सारा रिकॉर्ड सही था। दूसरे ही दिन दोसर भवन चौक पर इसी कंपनी का विस्फोटक मिलना आश्चर्य की बात है। उस पर भी बारकोड या बैच नंबर न हो तो मामला और गंभीर हो जाता है।

लावारिस स्थिति में बरामद किया गया विस्फोटक एसबीएल कंपनी का होने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण पुलिस के एसपी हर्ष पोद्दार और एडिश्नल एसपी अनिल मस्के ने दल-बल के साथ कंपनी का मुआयना किया। कंपनी में रखा सारा माल सुरक्षित था। कुछ भी संदिग्ध गतिविधि पुलिस को नहीं मिली है।

सभी एजेंसियां लगीं काम पर

विस्फोटक की जांच में सभी एजेंसियां काम पर लग गई हैं। सिटी पुलिस पेट्रोलियम व विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) के माध्यम से कंपनी में विस्फोटक उत्पादन और आपूर्ति का पता लगा रही है। प्रकरण संवेदनशील होने के कारण एटीएस की टीम भी जांच में जुट गई है। सिटी पुलिस और इंटेलिजेंस के साथ एटीएस का समन्वय जारी है। डीसीपी राहुल मदने ने बताया कि पुलिस हर एंगल से प्रकरण की जांच कर रही है।

लांजेवार के घर पर लगे कैमरे में वह परिसर कवर नहीं होता जहां विस्फोटक मिला है, इसीलिए आसपास के परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पकड़े जाने के डर से विस्फोटक वहां छोड़े जाने की संभावना है। डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ियों में बारकोड और बैच नंबर न होने के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि इसकी जांच भी पेसो द्वारा की जाएगी।

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