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Sharad Kelkar Birthday: एक्टर नहीं वॉइस ओवर आर्टिस्ट भी हैं शरद केलकर, इन फिल्मों में दी आवाज

Sharad Kelkar Birthday: एक्टर नहीं वॉइस ओवर आर्टिस्ट भी हैं शरद केलकर, इन फिल्मों में दी आवाज

नवभारत 7 months ago

Sharad Kelkar Birthday Special: शरद केलकर भारतीय मनोरंजन जगत की एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनकी आवाज और अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। हालांकि, 7 अक्टूबर को अभिनेता हर साल अपना जन्मदिन मनाते हैं।

इस खास दिन पर चलिए हम आपको उनके बारे में बताते हैं…

दरअसल, अभिनेता का जन्म 7 अक्टूबर 1976 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे शरद ने कभी नहीं सोचा था कि वह 'बाहुबली' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में वॉयसओवर करेंगे या 'तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर' में छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभाएंगे।

शरद केलकर ने ऐसे शुरू किया था करियर

शरद की शिक्षा भले ही फिजिकल एजुकेशन और एमबीए में हुई, लेकिन उनका जुनून अभिनय और वॉयसओवर की दुनिया में था। उनका करियर 2004 में टीवी शो 'आक्रोश' से शुरू हुआ, लेकिन असली पहचान उन्हें 'सिंदूर तेरे नाम का' और 'सात फेरे' जैसे शोज से मिली। 2009 में 'बैरी पिया' में ठाकुर दिग्विजय सिंह का किरदार निभाकर वह रातों-रात फेमस हो गए और 2010 के गोल्ड अवॉर्ड्स में बेस्ट निगेटिव एक्टर का खिताब जीतने में कामयाब रहे।

शरद केलकर की होस्टिंग और अभिनय क्षमता भी बेहतरीन है। 'रॉक-एन-रोल फैमिली' और 'पति पत्नी और वो' जैसे शो उन्हें दमदार होस्ट के रूप में पेश करते हैं। 2011 में 'उतरन' में सात्या का ग्रे शेड वाला रोल दर्शाता है कि वह हर तरह के किरदार को जीवंत कर सकते हैं।

फिल्मी दुनिया में शरद की एंट्री 2014 में मराठी ब्लॉकबस्टर 'लई भारी' से हुई। बॉलीवुड में 'हाउसफुल 4' में उनकी कॉमिक टाइमिंग और 'तान्हाजी' में शिवाजी महाराज के रोल ने उनकी रेंज दिखा दी। 'बाहुबली' सीरीज, हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों में उनके वॉयसओवर ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

चार दिन में तैयार किया था ‘शिवाजी महाराज’ का किरदार

एक दिलचस्प किस्सा 'तान्हाजी' से जुड़ा है। इस प्रतिष्ठित किरदार को निभाने के लिए शरद केलकर को केवल चार दिन का समय मिला। इस अल्प समय में उन्होंने महाराज की गरिमा, शौर्य और शालीनता को पूरी तरह आत्मसात किया। शरद ने किरदार को केवल राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी नेता, पिता और गुरु के रूप में देखा।

पर्दे पर उनका यह रोल आलोचकों और दर्शकों दोनों को बेहद पसंद आया। उनकी आंखों में दिखाई देने वाली शालीनता और दृढ़ विश्वास ने शिवाजी महाराज के किरदार को सजीव कर दिया। सोशल मीडिया पर फैंस ने भी लिखा कि शरद ने इस छोटी भूमिका में महाराज के व्यक्तित्व के साथ न्याय किया। फिलहाल शरद केलकर आज न केवल एक बेहतरीन अभिनेता हैं, बल्कि वॉयसओवर और होस्टिंग के क्षेत्र में भी मिसाल हैं, जिन्होंने अपने समर्पण और मेहनत से हर किरदार को जीवंत बनाया है।

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