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Silk Saree Hacks: असली सिल्क की साड़ी है या सिर्फ पॉलिएस्टर? घर पर ही ऐसे करें आसानी से पहचान

Silk Saree Hacks: असली सिल्क की साड़ी है या सिर्फ पॉलिएस्टर? घर पर ही ऐसे करें आसानी से पहचान

नवभारत 2 months ago

Silk Saree Guide: किसी भी फंक्शन या पार्टी में रॉयल और क्लासी लुक के लिए अक्सर लोग सिल्क साड़ी का कैरी करते हैं। भारतीय संस्कृति में साड़ी सिर्फ सुंदरता का प्रतीक नहीं है बल्कि यह परंपरा की गहरी छाप छोड़ता है।

यही कारण है कि हर महिला के अलमारी में एक साड़ी जरूर होती है। लेकिन परेशानी तक होती है जब हम हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी गलत सिल्क साड़ी खरीद लेते हैं।

असली सिल्क साड़ी और आर्टिफिशियल सिल्क साड़ी में काफी ज्यादा अंतर होता है। आजकल बाजार में नकली साड़ियां भी उतनी ही चमकदार और सुंदर बनाई जा रही हैं कि उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी सिल्क साड़ी खरीदने की योजना बना रही हैं तो इन आसान ट्रिक्स की मदद से आप ठगी का शिकार होने से बच सकती हैं।

बर्निंग टेस्ट

असली रेशम की सबसे बड़ी पहचान आग से होती है। साड़ी के किनारे से एक छोटा धागा निकालकर उसे जलाएं। यदि जलने पर जले हुए बालों जैसी गंध आए और उसकी राख काली व भुरभुरी हो तो वह असली सिल्क है। इसके विपरीत नकली सिल्क प्लास्टिक की तरह पिघलकर गांठ बन जाता है।

रगड़कर देखें

असली सिल्क एक नेचुरल फाइबर है। जब आप इसे अपनी हथेलियों के बीच तेजी से रगड़ेंगी तो आपको वहां हल्की गर्मी महसूस होगी। वहीं सिंथेटिक या नकली सिल्क रगड़ने पर बिल्कुल ठंडा रहता है।

रिंग टेस्ट

यह तरीका चिनिया सिल्क या क्रेप जैसी हल्की साड़ियों के लिए बेहतरीन है। साड़ी के एक हिस्से को अपनी अंगूठी के बीच से गुजारें। असली सिल्क इतना सॉफ्ट और लचीला होता है कि वह आसानी से अंगूठी के पार निकल जाएगा जबकि नकली सिल्क अक्सर बीच में अटक जाता है।

चमक और रंग का बदलाव

नकली सिल्क में एक सपाट और सफेद सी चमक होती है। असली रेशम की खासियत यह है कि इसे अलग-अलग एंगल से देखने पर इसका रंग हल्का बदलता हुआ दिखाई देता है। यह कुदरती चमक ही शुद्ध रेशम की मुख्य पहचान है।

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बुनाई और जरी का काम

साड़ी को उल्टा करके देखें। अगर पीछे की तरफ जरी के धागे बहुत ज्यादा उभरे हुए या चुभने वाले हैं, तो वह मशीन का काम हो सकता है जो अक्सर हल्की क्वालिटी का संकेत है। असली जरी में सोने या चांदी के बारीक तारों का उपयोग होता है। इसके अलावा हाथ से बुनी साड़ियों में हल्की असमानता दिख सकती है जो उनकी मौलिकता का प्रमाण है जबकि मशीन से बनी साड़ियां एकदम परफेक्ट दिखती हैं।

कीमत और टेक्सचर

रेशम के कीड़ों से धागा तैयार करने की प्रक्रिया महंगी और मेहनती होती है। यदि कोई आपको प्योर बनारसी या कांजीवरम सिल्क महज 1000-1500 रुपये में दे रहा है तो समझ लें कि वह नकली हो सकता है। असली सिल्क छूने पर मखमली और स्मूथ महसूस होता है और मुट्ठी में भींचने पर इसमें कॉटन की तरह सिलवटें नहीं पड़तीं।

पानी की बूंद का परीक्षण

सिल्क के एक कोने पर पानी की बूंद डालें। असली सिल्क पानी को तुरंत सोख लेता है जबकि सिंथेटिक कपड़े पर पानी की बूंद काफी देर तक ऊपर टिकी रहती है या फिसल जाती है।

सिल्क साड़ी खरीदना एक निवेश की तरह है। अगली बार शॉपिंग पर जाते समय इन छोटी लेकिन प्रभावी बातों का ध्यान रखें ताकि आपकी मेहनत की कमाई सही और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पर खर्च हो।

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