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Thane Easy Spit Project: थूक से पौधे उगाने को 9 लाख का अनोखा प्रयोग फेल, लोगों ने थूका, फिर भी नहीं उगे बीज

Thane Easy Spit Project: थूक से पौधे उगाने को 9 लाख का अनोखा प्रयोग फेल, लोगों ने थूका, फिर भी नहीं उगे बीज

Nine Lakh Spending On Easy Spit Project: मीरा- भाईंदर मनपा की वर्ष 2022 में शुरू की गई &dhapos;ईज़ी स्पिट&dhapos; यानी थूक के जरिए पौधे उगाने की अनोखी व हास्यास्पद पर्यावरणीय पहल अब सवालों के घेरे में है।

इस प्रयोग के तहत 15वें वित्त आयोग की निधी से करीब 9 लाख रुपये खर्च कर 50 ईज़ी स्पिट कनस्तर खरीदे गए थे।

इनमें विभिन्न पौधों के बीज रखे गए थे और लोगों से इन कनस्तरों में थूकने की अपील की गई थी। हालांकि, प्रयोग के दौरान न तो बीज अंकुरित हुए और न ही एक भी पौधा उगा। अब यह योजना बंद हो चुकी है और खरीदे गए कनस्तर उपयोग के अभाव में धूल फांकते नजर आ रहे हैं।

प्रभाग कार्यालयों से पार्कों तक लगाए गए थे कनस्तर

मनपा के पर्यावरण विभाग ने वर्ष 2022 में वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के उद्देश्य से इस नई अवधारणा को लागू किया था। इसके तहत प्रत्येक प्रभाग समिति कार्यालय, मैदान, पार्क, विभिन्न मनपा भवनों और मनपा मुख्यालय में 'ईज़ी स्पिट' कनस्तर लगाए गए थे।

प्रशासन का मानना था कि सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत को बदलने के साथ-साथ इन कनस्तरों में रखे बीजों को लोगों के थूक के माध्यम से आवश्यक नमी मिल सकेगी और उनसे पौधे उगेंगे।

लोगों ने थूका भी, लेकिन पौधे नहीं उगे

मीरा- भाईंदर मनपा प्रशासन की इस अनूठी अवधारणा को लेकर लोगों में भी उत्सुकता देखी गई। कुछ नागरिकों ने इन कनस्तरों को गमले की तरह इस्तेमाल किया और उनमें पत्तियां तक डाल दीं। कुछ लोगों ने बाकायदा कनस्तरों में थूककर बीजों के अंकुरित होने का इंतजार किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद एक भी बीज अंकुरित नहीं हुआ।

अनोखे प्रयोग पर खर्च हुए लाखों, अब जांच की मांग

मनपा प्रशासन ने उस समय इस पहल को अपनी दूरदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अभिनव कदम बताया था, लेकिन प्रयोग असफल होने के बाद वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।

अंततः 'ईज़ी स्पिट' कनस्तरों को हटा दिया गया और इस योजना पर खर्च की गई बड़ी रकम को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। थूक के जरिए बीजों से पौधे उगाने की यह अवधारणा दुनिया भर में व्यापक रूप से प्रचलित नहीं होने के बावजूद मीरा- भाईंदर मनपा द्वारा इसे लागू किया गया था।

अब योजना के विफल होने और जनता के कर के पैसे से करीब 9 लाख रुपये खर्च किए जाने को लेकर इस पूरे प्रयोग की जांच की मांग उठ रही है। सवाल यह भी है कि योजना शुरू करने से पहले इसकी व्यवहार्यता और वैज्ञानिक आधार की पर्याप्त जांच की गई थी या नहीं।

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