Wardha Jal Jeevan Mission: वर्धा जिले में निधि के अभाव में जल जीवन मिशन का कार्य अधर में लटका हैं। “हर घर नल से जल” की घोषणा करते हुए शुरू की गई यह योजना पिछले कुछ वर्ष से ठप पड़ी है।
जिले में ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के बिल बकाया हैं और निधि के अभाव में काम बंद हो गए हैं। कई स्थानों पर जल जीवन मिशन की योजना के अधूरे ढांचे धूल से पटे दिखाई दे रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत 31 मार्च 2024 तक काम पूरा करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन इसके बाद दो वर्ष बीत जाने और तीन बार समय सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद निधि के अभाव में काम ठप पड़े हैं।
इससे जिले में जल जीवन मिशन की स्थिति बिगड़ गई है। योजना की अवधि बढ़ी सरकार ने इस योजना को 2028 तक केंद्र बढ़ा दिया है, लेकिन अक्टूबर 2024 से अब तक केंद्र सरकार से एक रुपया भी निधि नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। केवल घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन योजनाओं के लिए निधि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इससे जिले की जल जीवन मिशन योजना संकट में हैं और कई स्थानों पर अधूरे ढांचे खड़े हैं।
कई ठेकेदारों ने बैंकों, सहकारी संस्थाओं और उधार लेकर काम पूरा करने की कोशिश की, लेकिन किए गए काम के पैसे न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। समय पर निधि न मिलने के कारण जल जीवन मिशन की योजना को जिले सहित पूरे राज्य में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हजारों काम निधि के अभाव में बंद हैं। कुछ गांवों में पानी की टंकी बन चुकी है तो कुछ जगह पाइपलाइन का काम हुआ है, लेकिन कई काम अधूरे पड़े हैं। इससे गांवों में पानी की कमी की समस्या अभी भी बनी हुई है।
जिले की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है
मिशन जल जीवन के अंतर्गत जिले में जिले में 839 पेयजल योजनाएं मंजूर की गई हैं। निधि के अभाव में 152 योजना के कार्य ठप्प पड़े है। इनमें से 159 योजनाओं के कार्य 75 से 99 प्रतिशत तक पूर्ण हुए है। 528 योजनाएं शत प्रतिशत पूर्ण हो चुकी हैं। जहां योजना शत प्रतिशत पूर्ण हुई वहां “हर घर नल से जल” की घोषणा के तहत परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, यह जानकारी ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग द्वारा दी गई है।
152 करोड़ की जरूरत
वर्धा जिले में मिशन जल जीवन यह योजना केंद्र व राज्य सरकार के तत्वावधान में चलाई जा रही है। जिसके अंतर्गत 240 करोड रूपयों का निधि अबतक प्राप्त हुआ। लेकिन इसके बाद वर्ष 2024 से केंद्र स्तर से निधि प्राप्त नहीं हुआ। परिणामवश 62 करोड के बिल पेंडिंग है। 90 करोड के निधि की मांग की है। कुल मिलाकर 152 करोड रूपयों के निधि की जरूरत होने की जानकारी है। केंद्र से निधि नहीं मिलने से योजना ठप्प है।

