Purushottam Maas Niyam: अधिकमास को हिंदू पंचांग में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इस बार हिंदू नव वर्ष 2083 में 12 की जगह 13 महीने होंगे।
इस महीने को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। खास बात यह है कि ये अतिरिक्त महीना हर तीन साल में एक बार आता है। मान्यता है कि अधिक मास में दान-पुण्य करने से भगवान श्री हरि विष्णु की अपार कृपा प्राप्त होती है। आइए पं. राकेश झा से जानते हैं कि इस बार अधिक मास कब से शुरु हो रहा है और इस पवित्र महीने में किन नियमों का पालन करना चाहिए।
कब से शुरु होगा अधिक मास?
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिक मास 17 मई, रविवार से शुरु होकर 15 जून 2026, सोमवार तक चलेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। मलमास के दौरान किया गया व्रत, तप, दान और पुण्य का अन्य महीनों की तुलना में अधिक फल देना वाला माना जाता है।
अधिक मास को क्यों कहा जाता है पुरुषोत्तम मास?
नारद पुराण के अनुसार, इस महीने में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं इसलिए कोई भी देवता मलमास का स्वामी बनने को तैयार नहीं था। इससे दुखी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास वैकुंठ गया, तब भगवान ने दया भाव दिखाते हुए खुद इस महीने के स्वामी बने। तब से इस महीने को भगवान विष्णु की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस महीने दीप दान करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अधिकमास लगने की क्या है वजह?
हिंदू पंचांग चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते हैं। सूर्य कैलेंडर में 365 दिन होते हैं, जबकि चंद्र कैलेंडर में 354 दिन होते हैं। सूर्य कैलेंडर की तुलना में चंद्र कैलेंडर में सालाना 11 दिन कम होते हैं। ऐसे में लगभग 32 महीने और 16 दिन बाद यह एक महीने के बराबर हो जाता है। ऐसे में सूर्य और चंद्र कैलेंडर को समान करने के लिए इसमें एक अतिरिक्त महीने को जोड़ दिया जाता है। इसे ही अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
मलमास के क्या हैं नियम?
- मलमास में किए गए पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्यों का अधिक फल मिलता है।
- मलमास में दीप दान करने से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- इस पवित्र महीने में रोजाना दीप दान से पूर्व जन्म के पाप नष्ट होते हैं।
- मलमास में भागवत कथा का श्रवण करना अत्यंत पुण्य दायी माना गया है।
- पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है।

