उन्होंने सोशल मीडिया पर 'कैप नंबर 278, साइनिंग ऑफ' लिखकर अपने 2011 से शुरू हुए शानदार करियर को विराम दिया। साल 2020-21 में एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद मेलबर्न में उनके द्वारा बनाए गए जुझारू 112 रनों को हर कोई याद रखेगा, लेकिन उनके करियर का एक ऐसा आंकड़ा भी है जिसे इतिहास में शायद ही कोई छू सके।
कप्तानी का वो अनोखा रिकॉर्ड, जो धोनी, कोहली या सचिन भी नहीं बना सके
अजिंक्य रहाणे को जब भी भारतीय टीम की कप्तानी का मौका मिला, वे कभी नहीं हारे। रहाणे ने 6 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिनमें से भारत ने 4 जीते और 2 मैच ड्रॉ रहे। वहीं 2015 में जिम्बाब्वे दौरे पर जब एमएस धोनी को आराम दिया गया था, तब रहाणे ने 3 वनडे मैचों में कप्तानी की और तीनों में भारत को जीत दिलाई। यानी कप्तानी में उनका रिकॉर्ड 100 फीसदी अजेय रहा। भारत के सबसे सफल कप्तानों में शुमार एमएस धोनी और विराट कोहली ने भी अपनी कप्तानी में कई मैच गंवाए, जबकि सचिन तेंदुलकर का कप्तानी रिकॉर्ड भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। लेकिन कामचलाऊ कप्तान के रूप में उतारे गए रहाणे के नेतृत्व में भारतीय टीम कभी हार का शिकार नहीं हुई।मजबूरी में मिली जिम्मेदारी, पर बना दिया इतिहास
रहाणे को कभी भी मुख्य कप्तान के तौर पर तैयार नहीं किया गया था। उन्हें जब भी कप्तानी मिली, वह किसी आपात स्थिति का नतीजा थी। साल 2017 में कोहली की चोट हो या 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड शर्मनाक हार के बाद कोहली का भारत वापस लौटना, रहाणे ने हर बार कार्यवाहक कप्तान के रूप में टीम की कमान संभाली। गाबा में ऑस्ट्रेलिया के 32 साल पुराने अजेय किले को तोड़कर 328 रनों का लक्ष्य हासिल करना और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतना भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा क्षण माना जाता है, जो रहाणे की ही कप्तानी में संभव हुआ था।मराठी में नाम का मतलब अजेय और कप्तानी में भी रहे अनबीटेबल
हालांकि आलोचक यह कह सकते हैं कि धोनी के 60 टेस्ट या कोहली के 68 टेस्ट मैचों की तुलना में रहाणे के 6 टेस्ट मैचों का सैंपल साइज काफी छोटा है। लंबे समय तक कप्तानी का दबाव झेलना अलग बात है, लेकिन क्रिकेट इतिहास में छोटी मगर बेदाग सफलताओं की भी अपनी अलग जगह होती है। रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 5,000 से ज्यादा रन और 12 शतक शामिल हैं। मराठी भाषा में अजिंक्य नाम का मतलब ही जिसे जीता न जा सके होता है, और एक कप्तान के रूप में रहाणे ने अपने नाम के हर एक अक्षर को सच साबित करके दिखाया।