कुछ दिनों से अर्चना पूरन सिंह की आयुर्वेदिक जिंदगी की चर्चा खूब चल रही है। बेटे आर्यमान सेठी के यूट्यूब व्लॉग में एक्ट्रेस ने बताया कि वो 15 दिन की डिटॉक्स डाइट लेकर आ रही है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, अर्चना बेंगलुरु में 15 दिन के एक आयुर्वेदिक वेलनेस प्रोग्राम में शामिल होने गई थीं।
जिसके बारे में वो वीडियो में बता रही हैं कि वहां कैसा शेड्यूल उन्होंने फॉलो किया और आगे भी उसी को जारी रखने की सलाह दी गई है।
सब्जी

वीडियो में मां-बेटे तोरई, चिचिंडा जैसी सब्जियों का जिक्र कर रहे हैं। ये सब्जियां Cucurbitaceae फैमिली से आती हैं, जिसमें लौकी, परवल भी शामिल हैं। साइंस डायरेक्ट पर मौजूद शोध के मुताबिक, इस फैमिली से आने वाले फूड्स में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीडायबिटिक, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीकैंसर एक्टिविटी होती हैं। यह पोलीफेनोल्स, टैनिन और कुकुरबिटेसिन्स से भरपूर होती हैं।
डॉक्टर गगन तिवारी ने बताया कि ये सब्जियां आपके पेट और डायजेशन के लिए काफी हेल्दी होती हैं। आसानी से पच जाती हैं और मोटापा नहीं बढ़ाती। इन्हें खाने से गैस, ब्लोटिंग की समस्या नहीं होती। शरीर में हाइड्रेशन सही रहता है और डायबिटीज-बीपी जैसी समस्या मैनेज करने में मदद मिलती है।
ना मीठा, ना मैदा, ना फ्राइड
ग्लूकोज शरीर की एनर्जी के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी जरूरी मात्रा कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और ताजे फल-सब्जी से मिल जाती है। डॉक्टर के मुताबिक, आप जो अतिरिक्त रिफाइंड शुगर, आर्टिफिशियल शुगर या एडिक्टिव्स खाते हैं, वो पैंक्रियाज पर अतिरिक्त लोड डालती हैं। जब पैंक्रियाज इस लोड को कम करने लायक इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर शरीर इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता तो ब्लड शुगर हाई रहने लगता है और डायबिटीज बन जाती है।डॉ. तिवारी के अनुसार, मैदा और फ्राइड फूड के अंदर कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसके मुकाबले फाइबर, विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स ना के बराबर होते हैं। इन्हें खाने से आपको केवल कैलोरी और ग्लूकोज मिलता है, जो धीरे-धीरे फैट बनकर शरीर पर इकट्ठा होने लगता है। साथ ही इन फूड्स को कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाला देखा गया है, जो आपकी धमनियों में जमने के बाद हाइपरटेंशन और हार्ट डिजीज का कारण बन सकता है।
7 बजे डिनर और 10 बजे सोना

लाखों साल से इंसान दिन में काम करता है और रात में सोता है। जिस वजह से उसकी बॉडी की इंटरनल सर्काडियन रिदम सूरज की रोशनी के मुताबिक लयबद्ध हो गई है। यानी सोना, जागना, हॉर्मोन को रिलीज करना आदि सारे आंतरिक काम शरीर सूरज के टाइम के अनुसार करता है। इसलिए रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना ज्यादा आरामदायक और फायदेमंद होता है।
डॉक्टर के मुताबिक, 10 बजे तक सोने से आपको सुबह तक नींद पूरी करने के लिए पर्याप्त 7-8 घंटे मिल जाते हैं। जो दिमाग को रिसेट और रिलेक्स करने के लिए काफी हैं। साथ ही, सोने से कम से कम 2 घंटे पहले डिनर करने पर खाना पूरी तरह पच जाता है। आपके लिवर और किडनी का अधिकतर कार्य पूरा हो जाता है, जिससे नींद के दौरान वो भी रिलेक्स कर पाते हैं। यह आपके मेटाबॉलिज्म, बॉडी फैट और हॉर्मोन को हेल्दी रखने के लिए आवश्यक है।
दिमाग पर कैसा होता है असर?
हमारी लाइफस्टाइल आजकल जंक फूड, स्नैक्स, मीठा और सुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। जिस वजह से बुनियादी और आयुर्वेदिक जीवन दिमाग के लिए काफी कठिन महसूस होता है। इसलिए आपको सारी चीजों को एकसाथ और अचानक बदलने की जगह जीवनशैली और खाने में छोटे-छोटे बदलाव करने चाहिए। यह लंबी और स्थाई आदतों को विकसित करने का सबसे बढ़िया तरीका है।
