नई दिल्ली: हाल में मध्य भारत के जंगलों में एक दुर्लभ काला तेंदुआ (ब्लैक पैंथर) दिखाई देने से वन विभाग सतर्क हो गया है। जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने जंगल के किनारे इस दुर्लभ जानवर को देखा और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
इस तेंदुए को देखकर हर कोई हैरान था। वन अधिकारियों के मुताबिक यह मेलानिस्टिक तेंदुआ है, जो सामान्य तेंदुए की ही एक दुर्लभ प्रजाति माना जाता है। तो चलिए जानते हैं काले तेंदुए की खासियत क्या है...
काले तेंदुए की मुख्य खासियतें
- दुर्लभता और उपस्थिति: ये मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के घने, नम उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाते हैं। भारत में ये पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व के जंगलों में देखे जाते हैं।
- माहिर शिकारी: इनकी आंखों की रोशनी मनुष्यों की तुलना में 8 गुना अधिक तेज होती है, जिससे ये रात के अंधेरे में भी शिकार करने में माहिर होते हैं।
- मेलानिज्म का प्रभाव: ये सामान्य तेंदुए ही होते हैं, लेकिन आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण इनका रंग काला होता है।
- एकाकी जीवन: सामान्य तेंदुओं की तरह, काला तेंदुआ भी अकेले रहना पसंद करता है।
- अनुवांशिक विशेषता: नर काले तेंदुए का वजन 80 से 90 किलो के आसपास हो सकता है, जबकि मादा का वजन 80 किलो तक होता है।
- छिपे हुए धब्बे: भले ही ये काले दिखते हैं, लेकिन प्रकाश में आने पर इनके शरीर पर तेंदुए के विशिष्ट धब्बे या रोसेट देखे जा सकते हैं।
कितना खतरनाक होता है काला तेंदुआ
भारत में काले तेंदुए कहां देखे जा सकते हैं?
नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (काबिनी, कर्नाटक)

