अक्सर मोतियाबिंद के मरीज तब मेरे पास आते हैं, जब बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन आंखों की रोशनी खत्म होने से पहले भी कुछ लक्षणों को पहचानकर मोतियाबिंद को पकड़ा जा सकता है। इन पर नजर बनाकर आप बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि सर्जरी की जरूरत है या नहीं?
आंखों की डॉक्टर होने के नाते मैं मोतियाबिंद के मरीजों से कहती हूं कि अगर आपको चश्मा लगाने के बाद भी देखने में परेशानी हो रही है तो यही वो संकेत है कि जिसे देखकर आप सर्जरी की जरूरत पता कर सकते हैं।
मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण

मोतियाबिंद की वजह से सबसे पहले आपकी नजर में दिक्कत आने लगती है। मरीजों को सबसे पहले पढ़ने में तकलीफ होने लगती है। पहले जो शब्द साफ दिखाई देते थे, वो धुंधले नजर आने लगते हैं, शब्दों पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है। बल्ब या लाइट के चारों तरफ चौंध या प्रभामंडल नजर आने लगता है, खासकर रात के वक्त ड्राइविंग करते वक्त लोगों को दिक्कत आती है। स्ट्रीटलाइट और गाड़ियों की हेडलाइट के चारों तरफ चौंध या रिंग नजर आने लगती है।
डैजलिंग और ब्लाइंडिंग
मोतियाबिंद के एक संकेत को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यह ब्लाइंडिंग या डैजलिंग है, जो धूप या दिन की रोशनी में आने पर महसूस होती है। इसकी वजह से रोशनी में आने पर कुछ सेकंड के लिए अंधेरा छा जाता है और कुछ दिखाई नहीं देता। अधिकतर लोगों को यह सामान्य संवेदनशीलता लगती है, लेकिन यह मोतियाबिंद का शुरुआती लक्षण हो सकता है। मोतियाबिंद से आपकी नजर प्रभावित होती है। दर्द, लालिमा या जलन जैसी दिक्कतें काफी दुर्लभ होती हैं। अगर किसी को ये सभी तकलीफें हो रही हैं तो कोई दूसरी समस्या भी हो सकती है।डबल विजन की दिक्कत
कुछ मरीज हमारे पास डबल विजन की समस्या लेकर आते हैं। मतलब उन्हें कई बार एक चीज डबल दिखने लगती है या फिर शब्दों की परछाई नजर आने लगती है। यह स्थिति आती-जाती रहती है और एक या दोनों आंखों में हो सकती है। यह मोतियाबिंद का लक्षण हो सकता है। हालांकि, अगर किसी को हमेशा ही डबल दिखाई देने के साथ में दर्द भी रहता हो तो यह मोतियाबिंद नहीं है। यह आंख की मूवमेंट को कंट्रोल करने वाली मसल्स या नर्व्स के साथ किसी दिक्कत की वजह से हो सकता है, जिसकी जांच करवानी चाहिए।कब पड़ती है सर्जरी की जरूरत?

मोतियाबिंद के गंभीर होने के साथ धुंधलापन भी बढ़ता जाता है। शुरुआत में चश्मा लगाने पर आराम मिल जाता है और साफ दिखने लगता है। जब तक चश्मे से फायदा मिलता रहता है, तबतक डॉक्टर सर्जरी करवाने की सलाह नहीं देते हैं। सर्जरी तब जरूरी हो जाती है, जब चश्मे से मदद मिलनी बंद हो जाती है। नया चश्मा लगवाने के बाद भी साफ दिखाई नहीं देता है। इस वक्त सर्जरी आवश्यक हो जाती है।
पास की नजर सही रहना और दूर की नजर में दिक्कत
मोतियाबिंद के मरीजों को एक अजीब सी दिक्कत भी होती है। उनकी पास की नजर ठीक हो जाती है, लेकिन दूर की नजर खराब होती जाती है। ऐसा मोतियाबिंद के एक टाइप में होता है, जिसे न्यूक्लियर कैटेरेक्ट कहते हैं। इसमें आंखों का लेंस बीच से मोटा हो जाता है और आंख केवल पास का देखने का काम करने लगती है। इस वजह से मरीज को अचानक चश्मे के बिना पास का साफ दिखने लगता है। इसमें खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह समस्या गंभीर होती जाती है और मरीज को सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है।मोतियाबिंद का खतरा किसे ज्यादा होता है?
हर किसी को एक ही उम्र या एक ही तरीके से मोतियाबिंद नहीं होता। डायबिटीज के मरीज या स्टेरॉइड दवा लेने वाले लोगों को आंखों की इस बीमारी के जल्दी होने का खतरा ज्यादा होता है। आमतौर पर इनके अंदर पोस्टीरियर सबकैप्सुलर कैटरेक्ट टाइप का मोतियाबिंद होता है, जो लेंस के पीछे की तरफ बनता है। इस टाइप का मुख्य लक्षण पढ़ने में दिक्कत और धूप में चौंध पड़ना होता है।डायबिटीज के जवान मरीज, ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाने वाले या लंबे समय से स्टेरॉइड पर चल रहे लोगों में हो रही इन दिक्कतों के पीछे अक्सर मोतियाबिंद की बीमारी देखी जाती है। इन मरीजों में इस बीमारी की जल्दी पहचान करना जरूरी है ताकि उम्र बढ़ने के साथ बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सके।
ध्यान रखें कि मोतियाबिंद का इलाज मुमकिन है और इसे जल्दी पकड़ना आवश्यक है। अगर आपकी नजर में किसी तरह की दिक्कत आ रही है, चाहे वो धुंधलापन हो, चौंध पड़नी हो, डबल विजन हो या अचानक पास की नजर का बेहतर हो जाना हो तो इसे इग्नोर ना करें। आंखों के डॉक्टर के पास जाकर सही जांच और इलाज करवाएं।

