नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में तमाम मुद्दों के बीच ध्रुवीकरण का पहलू भी उभरकर सामने आया। खासतौर से असम और पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण ज्यादा दिखा। इसके चलते जहां असम में मुस्लिम मतदाता बड़े पैमाने पर कांग्रेस के पाले में गए तो वहीं बंगाल में कांग्रेस ने TMC के वोट बैंक में सेंध लगाई।
असम में कांग्रेस ने 20 मुस्लिम और 79 गैर-मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी ने जो 19 सीटें जीतीं, उनमें से 18 पर मुस्लिम उम्मीदवार रहे। वहीं, बंगाल में कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिली। दोनों मुस्लिम उम्मीदवार हैं।
बंगाल में कांग्रेस ने 63 और TMC ने 47 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। केरल में 35 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली। इनमें 30 कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF से हैं। इनमें 8 मुस्लिम विधायक कांग्रेस और 22 उसकी सहयोगी IUML के हैं। तमिलनाडु में कांग्रेस ने 2 मुस्लिमों को टिकट दिया था। इनमें से एक ने जीत दर्ज की। केरल और असम में कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का स्ट्राइक रेट 80% रहा।
'TMC को इस बार मुसलमानों का एकमुश्त वोट नहीं मिला'
बंगाल के बारे में घोषाल ने कहा, 'वेस्ट बंगाल में ममता बनर्जी की TMC को इस बार मुसलमानों का एकमुश्त वोट नहीं मिला। TMC से उन्हें भी शिकायतें थीं। लेकिन चूंकि वे BJP से दूरी बनाते हैं, लिहाजा उनका काफी वोट इस बार कांग्रेस और कुछ हद तक CPM की ओर गया।'क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
राजनीतिक विश्लेषक जयंतो घोषाल कहते हैं, 'हर चुनाव की तरह ध्रुवीकरण इस बार भी दिखा। कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की बात है तो उसका और मुसलमानों का नाता आजादी के आंदोलन के समय से है। इन राज्यों में कांग्रेस के जो मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं, उन्हें केवल मुसलमानों का वोट नहीं मिला।' उन्होंने कहा, 'असम में चूंकि बीजेपी के सामने कांग्रेस ही दमदार विपक्षी पार्टी थी, इसलिए बीजेपी से दूरी बनाने वाले मुस्लिमों ने कांग्रेस को वोट दिया। पिछले चुनाव में असम में एकमुश्त मुस्लिम वोट कांग्रेस को नहीं मिले थे।' तब बदरुद्दीन अजमल के AIUDF ने 16 सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार 2 सीटों पर सिमट गई।'
