धार : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच आज अहम फैसला सुना दिया है। यह फैसला धार भोजशाला पर है। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट छह अप्रैल 2026 से हर दिन सुनवाई हुई थी।
सुनवाई के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने अपनी दलीलें दी। साथ ही एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्तियां भी जताई हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार दोपहर में हाईकोर्ट ने कहा है कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर है।
धार में बढ़ा दी गई है सुरक्षा
दरअसल, शुक्रवार जुमे की नमाज भी होती है। भोजशाला परिसर में भी नमाज अदा की जाती है। उसी समय हाईकोर्ट का फैसला आना है। ऐसे में धार में भोजशाला परिसर के बाहर आज तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। धार में सुरक्षा को लेकर चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती है। दूसरे जिले से भी पुलिस फोर्स को बुलाया गया है। साथ ही सुरक्षा को लेकर कड़ी निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की टीम नजर रख रही है। समाज के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की जा रही है।
एएसआई ने 2100 पन्नों की सौंपी है रिपोर्ट
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एएसआई ने भोजशाला परिसर का सर्वे किया था। यह सर्वे 98 दिनों तक चला था। इसकी शुरुआत 2024 में हुई थी। सर्वे पूरा होने के बाद एसएसआई ने 2100 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंप दी थी। इसके बाद सुनवाई शुरू हुई थी।
हाईकोर्ट में छह अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई
भोजशाला परिसर को लेकर एमपी हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में छह अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई थी। यह सुनवाई 12 मई तक चली है। पहले हिंदू पक्ष ने दलीलें दी थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष के लोगों ने दलीलें दीं। फिर एएसआई की रिपोर्ट पर दोनों पक्षों को आपत्तियां दर्ज करवाने का भी मौका दिया गया।

24 दिन में किसने क्या तर्क और साक्ष्य रखें
भोजशाला विवाद को लेकर हिंदू पक्ष का कहना है कि यह मामला प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के दायरे में नहीं आता क्योंकि भोजशाला एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है और इसका उल्लेख प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1951 में दर्ज है। हिंदू पक्ष ने कोर्ट से मांग की है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर इसे पूर्ण रूप से हिंदू समाज को सौंपा जाए ताकि यहां वर्षभर पूजा-अर्चना और हवन हो सके।
दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद है या जैनशाला। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने एएसआई सर्वे पर भी सवाल उठाए और कहा कि उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी और तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने अयोध्या मामले का जिक्र करते हुए कहा कि वहां रामलला की मूर्ति मौजूद थी जबकि भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति नहीं है।
वहीं, जैन समाज ने भी इस मामले में दावा किया है कि जिस प्रतिमा को मां वाग्देवी बताया जा रहा है वह जैन समाज की आराध्य मां अंबिका की प्रतिमा है। जैन पक्ष ने भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित करने की मांग की है।
ये हैं ऐतिहासिक तथ्य
- 1034 ईस्वी में राजा भोज ने धार में एक कॉलेज की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला कहा गया। यहां मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई थी।
- 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया और भोजशाला के एक हिस्से को बर्बाद कर दिया।
- 1401 से 1514 ईस्वी के बीच में दिलावर खान और बाद में महमूद खिलजी ने मस्जिद का निर्माण करवाया। इसका नाम कमल मौला मस्जिद रखा गया।
- 1875 ईस्वी में खुदाई के दौरान यहां मां सरस्वती की एक प्रतिमा मिली, जिसे बाद अंग्रेज में अंग्रेज लंदन ले गए। यह ब्रिटिश म्यूजियम रखी है।
अंग्रेजों ने संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया
- 1902 से 1903 के बीच लॉर्ड कर्जन के समय में यहां सर्वे हुआ, इसके बाद इसे संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया
- 1935 में धार रियासत के दीवान ने यहां मुस्लिमों को नमाज अदा करने की अनुमति प्रदान की। उसी समय हिंदुओं ने इसका विरोध किया।
- आजादी के बाद 1952 में भारत सरकार ने भोजशाला को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर दिया। साथ ही पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन कर दिया।
- 1997 में प्रशासन ने हिंदुओं को केवल बसंत पंचमी पर और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी। साथ ही बाकी दिन पर्यटन के लिए रखा गया।
2003 में आया अहम फैसला
भोजशाला पर दोनों पक्ष के लोगों अपना दावा ठोक रहे थे। सात अप्रैल 2003 को इस मामले में बड़ा फैसला आया है। इसमें कहा गया कि हिंदू पक्ष के लोग यहां हर मंगलवार को पूजा करेंगे। वहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग हर शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे। आम दिन यह पर्यटकों के लिए रहेगा। वे एक रुपए की शुल्क देकर परिसर में जा सकते हैं।
ये हैं विवाद के टर्निंग प्वाइंट
- 2022-23 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की कि पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करवाया जाए। साथ ही हिंदू पक्ष के लोगों को पूजा की अनुमति दी जाए।
- याचिका पर सुनवाई के बाद 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एएसआई को निर्देश दिए क वह ज्ञानवासी की तर्ज पर भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करें।
- 22 मार्च 2024 को एएसआई की टीम ने भोजशाला परिसर में खुदाई और सर्वे का काम शुरू किया।
- मुस्लिम पक्ष ने अपने अप्रैल 2024 में इसे रोकने की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे से रोकने से इनकार कर दिया। साथ ही बिना सर्वे के स्मारक के धार्मिक स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
- 15 जुलाई 2024 को एएसआई ने 2100 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी।
गौरतलब है कि इस मामले में 6 अप्रैल से हाईकोर्ट में हर दिन सुनवाई हुई। 12 मई को सुनवाई पूरी हो गई है। अब शुक्रवार को फैसले का दिन है। ऐसे में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

