नई दिल्ली: सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर गाड़ी का बीमा नहीं है तो उसे फ्यूल देने से मना किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह कोई बाध्यकारी आदेश नहीं है, लेकिन इसे एक सिफारिश की तरह ले सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय को पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया, जिससे पेट्रोल पंप पर वाहनों के बीमा की जांच हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे नंबर प्लेट कैप्चर करने वाले कैमरों को बीमा सूचना केंद्र और वाहन पोर्टल से जोड़ा जाए। इससे बगैर इंश्योरेंस वाले वाहनों की ऑटोमैटिक पहचान होगी और उनका ई-चालान हो सकेगा। कोर्ट ने पुलिस को भी ऐसे हैंडहेल्ड उपकरण या मोबाइल ऐप देने का निर्देश दिया, जिससे मौके पर ही वाहनों के बीमा की जांच हो सके।
'अतिरिक्त बीमा कवर का विकल्प दें'
बिना बीमा वाहन चलाना क्यों है बड़ी चिंता?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। ऐसे वाहनों से दुर्घटना होने पर पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी आती है और कई मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कोर्ट का मानना है कि बीमा की नियमित जांच और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम होगी, सड़क सुरक्षा मजबूत होगी और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने में भी मदद मिलेगी।
