ज्यादातर लोग अपने को हेल्दी रखने के लिए रेगूलर जिम जाते हैं या घर पर ही हल्के व्यायाम कर लेते हैं। जबकि, हड्डियां कमजोर होने की प्रक्रिया कई समय पहले से शुरु होती है, जब आपको हड्डियों में दर्द महसूस होता है या गिरने पर हड्डी टूट जाती है तब पता चलता है कि हड्डियां ज्यादा कमजोर हो चुकी हैं।
लेकिन, इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि आपको हड्डियों की मजबूती के बारे में कैसे पता चलेगा? एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हड्डियोंं की मजबूती को आप बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) से पता कर सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि बुजुर्ग व्यक्ति ही इस टेस्ट को कराएं, समय के साथ खानपान में आए बदलावों की वजह से कम उम्र के व्यक्ति भी इस टेस्ट को कराकर अपनी हड्डियों की जांच कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर Bone Density Test कराने से हड्डियों की कमजोरी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने के लिए उचित इलाज शुरू किया जा सकता है।
बोन डेंसिटी टेस्ट क्या होता है?
मैयोक्लीनिक के अनुसार बोन डेंसिटी टेस्ट एक विशेष जांच है, जिससे यह मापा जाता है कि आपकी हड्डियों में मिनरल्स (मुख्य रूप से कैल्शियम) की मात्रा कितनी है और वे कितनी मजबूत हैं। इस जांच को Dual-energy X-ray Absorptiometry (DEXA या DXA Scan) कहा जाता है।डेक्सा स्कैन मुख्य रूप से कूल्हे (Hip) और रीढ़ (Spine) की हड्डियों की घनत्व (Bone Mineral Density - BMD) मापता है। इसकी मदद से डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि हड्डियां सामान्य हैं, कमजोर हो रही हैं (Osteopenia) या ऑस्टियोपोरोसिस विकसित हो चुका है। डेक्सा स्कैन में बहुत कम मात्रा में एक्स-रे रेडिएशन का उपयोग होता है, इसलिए इसे सुरक्षित जांच माना जाता है।

यह टेस्ट कैसे किया जाता है?
एनएचएस के अनुसार बोन डेंसिटी टेस्ट एक नॉन इनवेसिव (एक गैर-आक्रामक) और दर्द रहित जांच होती है। आगे जानते हैं कैसे किया जाता है बोन डेंसिटी टेस्ट।- मरीज को एक सपाट टेबल पर लेटाया जाता है।
- डेक्सा मशीन शरीर के ऊपर से धीरे-धीरे गुजरती है।
- हिप और स्पाइन की हड्डियों की तस्वीरें ली जाती हैं।
- पूरी प्रक्रिया में लगभग 10-20 मिनट का समय लगता है।
- जांच के लिए किसी इंजेक्शन या एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती।
रिपोर्ट में मुख्य रूप से टी-स्कोर और जेड-स्कोर दिए जाते हैं।
टी-स्कोर+1 से -1 को सामान्य हड्डियां माना जाता है।- 1 से - 2.5: को ऑस्टियोपीनिया
- 2.5 या उससे भी कम जैसे कि - 2.8 आदि को ऑस्टोयोपोरोसिस माना जाता है।
किन लोगों को यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए?
मेडलाइन प्लस के अनुसार हर व्यक्ति को नियमित रूप से बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है।65 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाएं
रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से हड्डियां तेजी से कमजोर हो सकती हैं। जबकि अधिक उम्र होना भी हड्डियां कमजोर होने का कारक माना जा सकता है। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में भी बोन लॉस बढ़ता है।जल्दी मेनोपॉज वाली महिलाएं
यदि 45 वर्ष से पहले रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) हो जाए या दोनों अंडाशय निकाल दिए गए हों।लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले
किसी बीमारी में यदि व्यक्ति को लंबे समय तक स्टेरॉइड दी जा रही हैं तो इससे हड्डियां कमजोर हो सकती है। ऐसे लोगों को बोन डेंसिटी की आवश्यकता हो सकती है।50 की उम्र के बाद एक से अधिक फ्रैक्टर होना
50 की उम्र के बाद कम ऊंचाई से गिरने पर हड्डी टूटना या एक से अधिक बार फ्रैक्चर ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत हो सकता है।परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास हो
विशेषकर माता या पिता में कूल्हे के फ्रैक्चर का इतिहास।कम वजन वाले लोग
बीएमाई (BMI) बहुत कम होना भी जोखिम बढ़ाता है।हड्डियों की कमजोरी का पता हमेशा दर्द से नहीं चलता। कई बार ऑस्टियोपोरोसिस वर्षों तक बिना किसी लक्षण के विकसित होती रहती है और पहली बार मामूली गिरावट के बाद फ्रैक्चर के रूप में सामने आती है। ऐसे में बोन डेंसिटी टेस्ट समय रहते जोखिम का पता लगाने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि आपकी उम्र अधिक है, मेनोपॉज हो चुकी है, लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं या बिना बड़ी चोट के फ्रैक्चर हुआ है, तो डॉक्टर से बोन डेंसिटी टेस्ट के बारे में जरूर सलाह लें। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और उचित उपचार से हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है।

