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हिजाब, पगड़ी पहन सकते हैं, पर दफ्तर में तिलक, कलावा और सिंदूर बैन, लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर भड़के यूजर्स

हिजाब, पगड़ी पहन सकते हैं, पर दफ्तर में तिलक, कलावा और सिंदूर बैन, लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर भड़के यूजर्स

मुंबई : लेंसकार्ट कंपनी के कर्मचारियों के लिए जारी किए गए 'स्टाइल गाइड' को लेकर फिल्म निर्माता- निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने लोगों से कंपनी के बायकॉट की अपील की है।

उन्होंने कहा कि कंपनी हिजाब को अनुमति दे रही है लेकिन हिंदू कर्मचारियों के पारंपरिक चिह्नों जैसे बिंदी, तिलक और कलावा पर पूरी तरह बैन लगा रही है।

अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, 'पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से यही कहते हैं कि हिजाब तो ठीक है, लेकिन बिंदी, तिलक, कलावा नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि यह लेंसकार्ट के स्टाइल गाइड का 11वां पन्ना है, जो कंपनी के कर्मचारियों के लिए बनाया गया है। अशोक पंडित ने सवाल उठाया कि हिंदू-बहुल भारत में ऐसी कंपनी जो ज्यादातर हिंदू कर्मचारियों और ग्राहकों पर निर्भर है, वह हिंदू प्रतीकों पर प्रतिबंध क्यों लगा रही है?'

सोशल मीडिया पर आई सवालों की बाढ़

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर सवाल उठाए हैं। अशोक पंडित ने कंपनी के स्टाइल गाइड में दिए सख्त नियम के पन्ने को भी शेयर किया, जिसमें लिखा है-अगर कर्मचारी हिजाब पहनते हैं तो उसका रंग काला होना चाहिए। कंपनी
हिजाब पहनने की अनुमति देती है। हिजाब मीडियम चेस्ट कवरेज का होना चाहिए और उससे कंपनी का लोगो नहीं ढकना चाहिए। पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन वह भी सिर्फ काले रंग की होनी चाहिए। धार्मिक टीका, तिलक, बिंदी या स्टिकर लगाने की इजाजत नहीं है। वहीं, मेहंदी लगाने की भी मनाही है। खास मौके पर भी सिर्फ 10 दिन तक मैनेजमेंट की मंजूरी के बाद ही लगाई जा सकती है।

कंपनी के स्टाइल गाइड के अनुसार किसी भी तरह की टोपी या हैट पहनने पर भी रोक है। कंपनी ने कुछ अन्य नियम भी दिए हैं जैसे स्टोर पर ब्लू टॉर्च और स्प्रे बोतल साथ रखना, बाल अस्त-व्यस्त होने पर हेयर नेट का इस्तेमाल, टैटू छिपाने के लिए काली फिटेड टी-शर्ट आदि।

लोग बोले- कार्पोरेट जिहाद

अशोक पंडित ने इस नीति को हिंदू भावनाओं के प्रति असंवेदनशील बताते हुए कहा कि हिंदू-बहुल देश में हिंदू कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला यह दृष्टिकोण गलत है। उन्होंने लोगों से लेंसकार्ट प्रोडक्ट्स का बायकॉट करने की अपील की है। जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, 'कॉर्पोरेट जिहाद अब व्यापक बन गया है..
टीसीएस के बाद अब लेंसकार्ट भी सवालों के घेरे में, हिजाब, पगड़ी की अनुमति है लेकिन कलावा, बिंदी की नहीं। सिन्दूर दिखाई नहीं देना चाहिए।

'हिजाब पहन सकते हैं'

लेखिका शेफाली वैद्य ने भी यह स्क्रीनशॉट शेयर किया और इस कथित पॉलिसी पर सवाल उठाए। उनकी पोस्ट से यह संकेत मिला कि कंपनी के अंदरूनी नियम धार्मिक प्रतीकों के साथ अलग तरह से पेश आते हैं। उन्होंने लिखा, 'तो मैंने पुष्टि कर ली है, यह सच है। पियूष बंसल अपने कर्मचारियों से यही कहते हैं कि हिजाब ठीक है, लेकिन बिंदी/तिलक/कलावा नहीं। यह बात लेंसकार्ट जैसी कंपनी के लिए है, जो हिंदू-बहुल भारत में मौजूद है, जहां ज़्यादातर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं।'
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