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IELTS में कम स्कोर, तो टूट सकता है विदेश में पढ़ने का ख्वाब, एक्सपर्ट ने बताया टेस्ट में कौन सी गलती ना करें

IELTS में कम स्कोर, तो टूट सकता है विदेश में पढ़ने का ख्वाब, एक्सपर्ट ने बताया टेस्ट में कौन सी गलती ना करें

IELTS Exam: विदेश में पढ़ाई के लिए प्लान करने वाले स्टूडेंट्स को अंग्रेजी का एक खास टेस्ट देना होता है, जिसे IELTS के तौर पर जाना जाता है। विदेश में किसी भी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना हो, बिना IELTS स्कोर एडमिशन नहीं मिलता है।

इस वजह से अंग्रेजी के इस एग्जाम का महत्व काफी ज्यादा बढ़ जाता है। अगर आप भी विदेश में पढ़ने की तैयारी कर रहे हैं या फिर आपको स्प्रिंग इनटेक में एडमिशन लेना है, तो अभी से ही IELTS की तैयारी शुरू करनी होगी।


IELTS को लेकर एक गलतफहमी ये रहती है कि स्टूडेंट्स इसे अंग्रेजी की आम परीक्षा मान बैठते हैं, जिस वजह से वो कई गलतियां भी कर बैठते हैं। इसका सीधा असर उनके बैंड स्कोर पर पड़ता है। ग्लोबल एजुकेशन मेंटर रितिका गुप्ता का कहना है कि कुछ लोग सिर्फ ग्रामर पर फोकस करते हैं, जबकि कुछ को रटने की आदत होती है। इस वजह से उनके एग्जाम में कम स्कोर आते हैं। ऐसे स्टूडेंट्स को उन्होंने सलाह भी दी है, ताकि उनके स्कोर सुधर सकें।

क्या है IELTS एग्जाम?

  • IELTS एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एग्जाम है, जो अंग्रेजी बोलने वाले देशों में पढ़ाई या काम करने के लिए जा रहे लोगों को देना होता है।
  • ये एग्जाम मुख्य रूप से चार प्रमुख सेक्शन-Listening (सुनना), Reading (पढ़ना), Writing (लिखना) और Speaking (बोलना)-में बंटी है।
  • IELTS एग्जाम लगभग 2 घंटे 45 मिनट की होती है, जिसमें हर सेक्शन का मूल्यांकन 0 से 9 तक के बैंड स्कोर के आधार पर किया जाता है।
  • अंत में सभी चारों सेक्शन के अंकों को मिलाकर एक औसत ओवरऑल बैंड स्कोर तय किया जाता है, जो 0 से 9 के बीच में रहता है।

किस गलती करने से बचें स्टूडेंट्स?

Aaera कंसल्टेंट की CEO और ग्लोबल एजुकेशन मेंटर रितिका गुप्ता ने नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से बात करते हुए बताया कि अगर कोई रेगुलर प्रैक्टिस करता है, मॉक टेस्ट देता है, फीडबैक लेता है और एग्जाम के चारों सेक्शन पर सही से ध्यान देता है, तो उनके लिए एग्जाम में अच्छा बैंड स्कोर लाना आसान हो जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि अच्छी तैयारी का तरीका क्या है। रितिका गुप्ता ने कहा, 'एक अच्छी तैयारी की स्ट्रैटेजी बनाते समय कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए: सबसे पहले, इसमें रेगुलर प्रैक्टिस, मॉक टेस्ट, फीडबैक और एग्जाम के सभी चारों सेक्शन (Listening, Reading, Writing और Speaking) पर फोकस शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, सुधार करने के लिए एग्जाम से पहले अपनी व्यक्तिगत कमजोरियों का पता लगाना और उन पर काम करना जरूरी है।'
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