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IMDb पर 8.7 रेटिंग, OTT पर हिंदी में 170 मिनट की साइकोलॉजिकल थ्र‍िलर, क्‍लाइमैक्‍स में पलट जाती है कहानी

IMDb पर 8.7 रेटिंग, OTT पर हिंदी में 170 मिनट की साइकोलॉजिकल थ्र‍िलर, क्‍लाइमैक्‍स में पलट जाती है कहानी

क बूढ़ा शराबी, सनकी और रईस आदमी, जो अपने पुरखों के महल में जिंदगी के आख‍िरी मोड़ पर है। लिवर कैंसर के कारण उसके पास सिर्फ 4 महीने बचे हैं। पत्‍नी उससे अलग रह रही है। बड़ा बेटा मर चुका है।

जबकि छोटा बेटा परेशान है। डॉक्‍टर जवाब दे चुके हैं, लेकिन एक जुनून उस सनकी बूढ़े को जिंदा रखता है। मूल रूप से तेलुगू में बनी सत्‍यदेव स्‍टारर 'राव बहादुर' ऐसी फिल्‍म है, जिसकी लोग तारीफ करते नहीं थकते। IMDb पर इसे 8.7 रेटिंग मिली है। इसी महीने 03 जुलाई को यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और अब OTT पर रिलीज हो रही है, वो भी हिंदी में।

जब से 'राव बहादुर' के ओटीटी रिलीज का ऐलान हुआ है, तेलुगू के दर्शक उत्‍साहित हैं। जब फिल्‍म रिलीज हुई थी, तब कई लोगों ने कहा था कि यह एक 'कल्‍ट' है। जाहिर है, आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्‍यों? इसकी एक वजह जहां सत्‍यदेव, विकास मुप्पाला, दीपा थॉमस, बाला पारासर, आनंद, और
प्रणय वाका जैसे सितारों की दमदार अदाकारी है, वहीं डायरेक्‍टर वेंकटेश महा की हुई लिखी हुई बेजोड़ कहानी।

राव बहादुर OTT रिलीज: कब और कहां देखें

वेंकटेश महा के डायरेक्‍शन में बनी साइकोलॉजिकल थ्र‍िलर और डार्क कॉमेडी फ‍िल्म 'राव बहादुर' को महेश बाबू और नम्रता शिरोडकर ने GMB एंटरटेनमेंट के बैनर तले पेश किया था। Netflix ने घोषणा की है कि 'राव बहादुर' शुक्रवार 31 जुलाई से तेलुगू, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी भाषाओं में स्ट्रीम होगी।

'राव बहादुर' की कहानी

भुवनम रामप्पा राव बहादुर (सत्‍यदेव), एक बूढ़ा, शराबी और मानसिक रूप से अस्थिर रईस आदमी है, जो लिवर कैंसर के आख‍िरी स्‍टेज पर है। डॉक्‍टर जवाब दे चुके हैं कि उसके पास बस चार महीने बचे हैं। लेकिन ताज्‍जुब तब होता है, जब अपनी पुश्तैनी हवेली 'भुवनालयम' में राव बहादुर यानी रामप्पा अपनी अनुमानित उम्र से ज्यादा जीता हैं। उसे एक अजीब जुनून है, जो उसे जिंदा रखता है। उसे शक है कि उनका छोटा बेटा कुसुमाप्पा उर्फ ​​कुसुमा, उसका अपना बच्चा नहीं था। रामप्पा की पत्नी रेणुका (दीपा थॉमस) ने खुद को एक अंधेरे कमरे में अलग-थलग कर लिया है, जबकि बड़ा बेटा लवनप्पा उर्फ ​​लवाना, पिता की बीमारी और मां की दूरी के बोझ तले दबा हुआ है। सिर्फ रामप्पा के करीबी दोस्त और परिवार के डॉक्टर डॉ. श्रीनिवास आचारी (विकास मुप्पाला) ही उसके इस जुनून के बारे में जानते हैं।

फ्लैशबैक में 1961 से जुड़े कहानी के तार

फिल्‍म इसके बाद फ्लैशबैक में जाती है। पता चलता है कि 1961 में रामप्पा एक प्रगतिशील युवा थे जो अपने रूढ़िवादी पिता से अलग हो गया था। आचारी के कहने पर वह लकवाग्रस्त पिता की देखभाल के लिए घर लौटता है और रेणुका नाम की एक आजाद ख्यालों वाली नर्स के प्यार में पड़ जाता हैं, जो पिता की देखभाल कर रही होती है। पिता की मौत के बाद, रामप्पा जब रेणुका को शादी का प्रस्ताव देता है तो यह कहकर ठुकरा देती है कि उसे किसी और से प्यार है। दिल टूटने और उदासी के बीच, रामप्पा को एक अजीब अनुभव होता है जिसमें उसके पूर्वजों की आत्माएं उसे परिवार की परंपराओं को मानने और वारिस पैदा करके वंश को आगे बढ़ाने के लिए मनाती हैं। अपनी जिम्मेदारी के एहसास से रामप्पा, आचारी के जरिए फिर से शादी का प्रस्ताव रखता है और इस बार रेणुका मान जाती है।

कुसुमा का जन्‍म, और नाजायज होने का शक

बरसों बाद कुसुमा का जन्म होता है, जो सांवले रंग का है। उसके नाजायज होने की अफवाहें फैल जाती हैं। रामप्पा भावनात्मक रूप से टूट जाता है। वह रेणुका के साथ बुरा बर्ताव करता है और लवाना को ज्यादा पसंद करता है। जब लवाना अपने छोटे भाई को उसके माता-पिता के बारे में ताना मारता है, तो दुखी कुसुमा उस पर हमला कर देता है। इस पर रामप्पा उसे डांटता है और उसके जन्म की वैधता पर सवाल उठाता है। नतीजतन, कुसुमा महल के तालाब में डूबकर आत्महत्या कर लेता है। रेणुका इसके लिए रामप्पा को दोषी ठहराती है और खुद को अलग-थलग कर लेती है, जबकि अपराधबोध से भरा रामप्पा धीरे-धीरे अपना मानसिक संतुलन खो देता है।

DNA टेस्टिंग, झूठा पुलिस केस और डॉ. आचारी

अब कहानी फिर से आज के समय में लौटती है। रामप्पा को DNA टेस्टिंग के बारे में पता चलता है। कुसुमा की यादों से प्रेरित होकर, वह एक रस्म के बहाने लवाना को कब्र खोदने के लिए इमोशनली ब्लैकमेल करता है और चुपके से कंकाल का कुछ हिस्सा चुरा लेता है। जब आचारी उसे इस बेअदबी के लिए डांटता है और DNA टेस्टिंग से जुड़ी कानूनी पाबंदियों के बारे में बताते हैं, तो रामप्पा को आचारी पर ही शक होने लगता है। खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए आचारी पुलिस का सहारा लेता है। रामप्पा के खिलाफ एक झूठी शिकायत दर्ज करवाता है, जिसमें उस पर बचपन में कुसुमा को अगवा करने का आरोप लगाया जाता है। इसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर ए. जगन्नाधन मामले की आधिकारिक जांच करते हैं और कोर्ट के आदेश पर कंकाल का DNA टेस्ट होता है।

'राव बहादुर' का ट्रेलर

क्‍लाइमैक्‍स में रामप्पा की मौत के बाद जबरदस्‍त ट्व‍िस्‍ट

अब कहानी में DNA टेस्ट का फैसला है। रामप्पा का जुनून है, जो उसकी शाही वंशावली के बेदाग होने पर भी खत्‍म होगी। लेकिन क्‍या ऐसा होता है। यह जानने के लिए आपको फिल्‍म देखनी होगी, क्‍योंकि कहानी में एक और ट्व‍िस्‍ट है, जो DNA रिपोर्ट और रामप्पा की मौत के बाद आता है।
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