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Janganana 2026-27: जनगणना क्या है, क्यों और कैसे होती है? इस बार बदल गया तरीका, आसान शब्दों में समझें इतिहास

Janganana 2026-27: जनगणना क्या है, क्यों और कैसे होती है? इस बार बदल गया तरीका, आसान शब्दों में समझें इतिहास

Census of India 2026-27 Complete Guide: भारत में जनगणना की प्रक्रिया देश के कई पहलुओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश में जनगणना (Census) से देश की जनसंख्या, सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों की समझ होती है।

जनगणना हर 10 साल में आयोजित होती है, जिसकी शुरुआत आजादी से पहले हुई थी। इस प्रक्रिया में लोगों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाती है।

स्वतंत्र भारत में अब तक 7 बार जनगणना (Janganana) हो चुकी है लेकिन इस बार जनगणना का तरीका थोड़ा बदल गया है। ऐसे में यह सझना जरूरी है कि जनगणना क्यों और कैसे होती है। इसका तरीका और इतिहास भी परीक्षाओं और इंटरव्यू में जीके के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इसलिए आइए विस्तार से समझते हैं भारत की जनगणना के बारे में।

जनगणना क्या है?

भारत में जनगणना (Census of India) एक प्रक्रिया है जिसमें किसी किसी क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों से जुड़ी जानकारी एक निश्चित समय पर इकट्ठा की जाती है। इसमें लोगों की संख्या, उम्र, शिक्षा, काम और रहने की स्थिति जैसी बातें शामिल होती हैं। एकत्र की गई इस जानकारी को व्यवस्थित करके उसका एनालिसिसि किया जाता है और फिर लोगों और सरकार तक पहुंचाया जाता है।

भारत की जनगणना: मुख्य जानकारी

Janganana क्या हैदेश के सभी लोगों की गिनती और उनसे जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने की प्रक्रिया
कब होती हैहर 10 साल में एक बार
अगली जनगणना2026-27
जिम्मेदार मंत्रालयभारत सरकार का गृह मंत्रालय
मुख्य उद्देश्यजनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति की सही जानकारी करना
प्रक्रियाघर-घर सर्वे और अब डिजिटल माध्यम से डेटा एकत्र करना
नया तरीकामोबाइल ऐप और ऑनलाइन फॉर्म
उपयोग
सरकारी योजनाएं, नीतियां और विकास कार्य
महत्वदेश की वास्तविक स्थिति की समझ

भारत में जनगणना क्यों होती है?

देश में जनगणना कराने के पीछे अलग-अलग उद्देश्य और कारण होते हैं, जिन्हें यहां बताया जा रहा है-
  • जनगणना से यह समझने में मदद मिलती है कि समय के साथ जनसंख्या में क्या बदलाव आ रहे हैं और कौन-कौन से रुझान सामने आ रहे हैं।
  • शहरी और ग्रामीण विकास की सही योजना बनाने में मदद के लिए।
  • जनगणना इसलिए की जाती है ताकि देश की जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, बेरोजगारी और रहने की स्थिति की सही जानकारी मिल सके।
  • नए जिले, राज्य या निर्वाचन क्षेत्र तय करने में सहायता के लिए।
  • आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की बेहतर योजना बनाने के लिए।
  • व्यापार और उद्योग को सही स्थान और बाजार समझने में मदद के लिए।
  • प्रवासन (Migration) के रुझानों को जानने के लिए।
  • महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए।
  • जनगणना से इससे सरकार बेहतर योजनाएं बना पाती है।

भारत में जनगणना का इतिहास क्या है?

pib.gov.in पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश की जनगणना, भारत में जनगणना का काम जनगणना अधिनियम, 1948 और नियम, 1990 के तहत किया जाता है। भारतीय संविधान के अनुसार जनगणना केंद्र सरकार के अधिकार में आती है, इसलिए इसका संचालन केंद्र सरकार करती है, लेकिन इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी सहयोग करते हैं। इससे पूरे देश में यह काम आसानी से पूरा हो पाता है।


भारत की जनगणना दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। पहली जनसंख्या गणना 1865-1872 के बीच हुई थी, जबकि 1881 में पहली बार पूरे देश में एक साथ जनगणना कराई गई। इसके बाद हर 10 साल में जनगणना होती रही है। कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो सकी, इसलिए 2027 में जनगणना होगी, जो आजादी के बाद 8वीं है।

जनगणना कैसे होती है?

जनगणना की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले घरों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद प्रशिक्षित गणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाते हैं। अब डिजिटल साधनों से डेटा सीधे दर्ज किया जाता है। फिर इस डेटा का वेरिफिकेशन और एनालिसिस किया जाता है। अंत में रिपोर्ट तैयार कर सरकार और जनता के लिए जारी की जाती है।

डिजिटल जनगणना 2026-27 का बदला है तरीका

अभी डिजिटल जनगणना 2026-27 (Census of India 2026-27) का प्रोसेस शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार पारंपरिक कागजी प्रक्रिया के साथ डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जाएगा। गणना करने वाले कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे और नागरिक खुद भी ऑनलाइन जानकारी दे सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और गलतियों की संभावना कम होने की संभावना है। यह नई प्रणाली जनगणना को अधिक आधुनिक, तेज और पारदर्शी बनाए रखने के लिए है।

जनगणना 2026-27 की प्रक्रिया क्या है?

जनगणना 2026-27 की प्रक्रिया पूरे देश में 2 चरण (Two-phase) में पूरी होगी। जनगणना 2027 को बेहतर बनाने के लिए एक नई 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS)' पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल से अधिकारी जनगणना की प्रगति, काम की स्थिति और तैयारियों को रियल टाइम में देख सकेंगे। इसके अलावा पूरा प्रोसेस इस प्रकार है-
  • इस बार डेटा को उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मॉनिटर किया जाएगा।
  • इसके लिए एक खास मोबाइल ऐप (HLO App) भी बनाया गया है, जिससे घर-घर से डेटा इकट्ठा किया जाएगा।
  • यह ऐप ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में काम करेगा और डेटा सीधे सिस्टम में भेजेगा।
  • इससे कागज का इस्तेमाल खत्म होगा और प्रक्रिया तेज होगी।
  • यह ऐप एंड्रॉइड और iOS दोनों पर चलेगा और लगभग 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा।
पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और आवास गणना (HLO) होगी, जिसकी प्रक्रिया इस प्रकार है-
  • HLO का काम अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा।
  • हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 30 दिनों में पूरा किया जाएगा।
  • इससे पहले 15 दिनों तक स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प मिलेगा।
  • इसमें घर-घर जाकर जानकारी ली जाएगी।
  • मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिवार की संपत्ति का डेटा जुटाया जाएगा।
  • यह अगले चरण की तैयारी के लिए आधार बनाता है।
इसके बाद दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें जनसंख्या गणना (Population Enumeration) पर काम शुरू होगा। इसका प्रोसेस इस प्रकार है-
  • जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।
  • इसमें हर व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और प्रवासन से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।
  • इसी चरण में जातिगत गणना भी की जाएगी।
  • कुछ पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल) में यह चरण सितंबर 2026 में होगा।
  • अंतिम तारीखें और प्रश्नावली बाद में जारी की जाएंगी।

जनगणना डेटा का उपयोग क्या है?

जनगणना से मिली जानकारी का उपयोग सरकार योजनाएं बनाने और संसाधनों के सही वितरण के लिए करती है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास से जुड़ी नीतियों को बेहतर बनाया जाता है। इसके अलावा शोध, व्यापार और विकास योजनाओं में भी यह डेटा बहुत काम आता है, क्योंकि यह समाज की वास्तविक स्थिति को दिखाता है।

Janganana 2011 और 2026-27 में अंतर क्या है?

2011 की जनगणना पूरी तरह कागज आधारित थी, जिसमें डेटा बाद में कंप्यूटर में दर्ज किया गया। जबकि 2026-27 की जनगणना में डिजिटल तकनीक का उपयोग होगा, जैसे मोबाइल ऐप और ऑनलाइन फॉर्म। इससे डेटा सीधे सिस्टम में जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज होगी-
अंतरजनगणना 2011जनगणना 2026-27
तरीकाकागज आधारित हुई थीडिजिटल और कागज दोनों में होगी
डेटा एंट्रीबाद में कंप्यूटर में एंट्री हुई थीसीधे डिजिटल सिस्टम में डेटा फीड किया जाएगा
सुविधासीमित सुविधा के साथ हुई थीलोगों के पास ऑनलाइन स्वयं जानकारी देने की सुविधा

भारत में जनगणना कब होगी?

भारत में अभी जनगणना 2026-27 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले यह 2021 में होनी थी लेकिन अब सरकार इसे नए डिजिटल तरीके से कराने की तैयारी कर रही है। इसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। समय के साथ इसकी प्रक्रिया और तकनीक में कई बदलाव आए हैं, जिससे डेटा पहले से अधिक सटीक और उपयोगी बन गया है।

  1. भारत में जनगणना कितने साल में होती है?
    भारत में जनगणना हर 10 साल में एक बार की जाती है ताकि जनसंख्या और विकास से जुड़ा सही डेटा मिल सके।
  2. भारत में अगली जनगणना कब होगी?
    भारत की अगली जनगणना 2026-27 में होनी है, जो डिजिटल तरीके से भी की जाएगी।
  3. जनगणना क्यों जरूरी है?
    Janganana सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास योजनाएं बनाने में मदद करती है और सही संसाधन वितरण सुनिश्चित करती है।
  4. जनगणना डेटा का उपयोग कहां होता है?
    इस डेटा का उपयोग सरकारी नीतियों, योजनाओं और देश के विकास की रणनीति बनाने में किया जाता है
  5. भारत में जनगणना कौन करता है?
    भारत में जनगणना का काम भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत किया जाता है।
  6. क्या जनगणना डिजिटल होगी?
    देश में 2026-27 में जनगणना में डिजिटल तकनीक का उपयोग होगा, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सिस्टम से डेटा एकत्र किया जाएगा।
  7. जनगणना क्यों जरूरी होती है?
    यह सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास योजनाएं बनाने में मदद करती है और सही संसाधन वितरण सुनिश्चित करती है।
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