लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और चांसलर आनंदीबेन पटेल ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल की निंदा की है।
उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार देश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि जंतर-मंतर के आंदोलन ने हमारी आंखें खोल दी हैं। हिम्मत से जैसे उन सबको आजादी मिल गई थी। प्रधानमंत्री को भी गालियां दी गईं। क्या परिणाम आया, नोटिस मिल रहे हैं न। क्या यही उनकी शिक्षा और संस्कार हैं?
लखनऊ यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदी बेन ने कहा, 'जंतर-मंतर का विरोध-प्रदर्शन आंखें खोलने वाला था। क्या यही हमारी शिक्षा और संस्कृति है? प्रधानमंत्री और अन्य लोगों को अपशब्द कहना स्वीकार्य नहीं है।'
प्रधानमंत्री तक को गालियां मिल रहीं!
राज्यपाल आनंदी बेन ने कहा, पत्रकार मित्र सभी से उनकी बात पूछते हैं। अब सभी को बोलने की आजादी है। प्रधानमंत्री तक को गालियां मिल रही हैं। क्या शिक्षा लेकर आए हैं हम? प्रधानमंत्री के विकास के एजेंडे की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माण ही सार्वजनिक जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।गालियां देने वाली छात्रा पर केस दर्ज
हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक वीडियो को लेकर नोएडा में एफआईआर दर्ज की गई है। इस वीडियो में रुचिका सिंह नाम की लड़की प्रधानमंत्री मोदी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। एक शिकायत के आधार पर 29 जुलाई को नोएडा में जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी।आरोपी रुचिका सिंह ने मांगी माफी
हालांकि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियां देने की आरोपी रुचिका सिंह ने शनिवार को माफी मांग ली है। उनका एक वीडियो सामने आया है। उसने कहा कि उसने विरोध प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि पीएम सहित अन्य मंत्रियों के लिए सिर्फ रुचिकी ही नहीं, कई अन्य प्रदर्शनकारियों ने अभद्र भाषा का उपयोग किया था। रुचिका सिंह का दावा है कि वह सिर्फ 15 साल की है। हालांकि पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है उसमें उसकी उम्र 25 साल बताई गई है।पीएम मोदी ने गालियां देने वालों को किया माफ
इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें और उनकी दिवंगत मां को कथित तौर पर गाली देने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा था कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह किसी भी सभ्य समाज के अनुरूप नहीं है। उन्होंने समाज से छात्रों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने की जगह उन्हें सुधारने और सही रास्ता दिखाने की अपील की थी।युवाओं को सही दिशा दिखाई जाए
वीडियो मैसेज में पीएम मोदी ने कहा, कुछ शरारती बच्चों ने बहुत गंदी गालियां दीं। गालियां मुझे दी गईं और मेरी दिवंगत मां को भी दी गईं। इस तरह की भाषा को लेकर समाज का गुस्सा स्वाभाविक है, खास तौर पर जब कथित तौर पर कुछ युवा महिलाओं द्वारा भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि इन युवाओं को सही दिशा दिखाई जाए, न कि उन्हें कानूनी लड़ाई में उलझाया जाए। उन्होंने कहा कि ये भटके हुए बच्चे हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाना समाज का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सजा देकर, अदालतों के चक्कर लगवाकर या समाज में परेशान करके परिस्थितियों को नहीं बदला जा सकता।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे इन छात्रों को माफ करना चाहते हैं और समाज से भी ऐसा ही करने की अपील करते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब गलती से जीभ दांतों के बीच आ जाती है और खून निकल आता है, तो हम अपने दांत नहीं तोड़ देते, क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है। इसी तरह ये बच्चे भी हमारे ही हैं।

