जयपुर: जिस जेन-जी के आंदोलन के आगे केंद्र सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उस जेन जी को लेकर राजस्थान भाजपा में नया फरमान जारी हुआ है।
पार्टी के संगठन महामंत्री ने 'जेन-जी' शब्द पर एतराज जताया है। भाजपा मुख्यालय में हुई एक अहम बैठक में संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे इस शब्द का इस्तेमाल ना करें।
पदाधिकारी ने सवाल पूछा तो दे डाली नसीहत
मंगलवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में निकाय चुनाव को लेकर अहम बैठक हुई। इस बैठक में संगठन महामंत्री अजेय कुमार और चुनाव संचालन समिति के सदस्य डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी, श्रवण सिंह बगड़ी, मंत्री संजय शर्मा, अविनाश गहलोत, झाबर सिंह खर्रा सहित कई विधायक, दर्जनों पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। बैठक के दौरान संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए सुझाव मांगे। इस दौरान एक पदाधिकारी ने कहा कि हमें जेन-जी को भी साधना पड़ेगा। जेन-जी सुनते ही संगठन महामंत्री ने नाराजगी जता दी। उन्होंने पदाधिकारी से पूछा कि यह क्या होता है। इसके बाद जेन-जी शब्द का इस्तेमाल करने वाले पदाधिकारी चुप हो गए।जेन-जी के स्थान पर युवा शक्ति बोलो
संगठन महामंत्री ने कहा कि हमें जेन-जी शब्द का इस्तेमाल नहीं करना है। हमें हमारी संस्कृति के मुताबिक युवाओं को युवा शक्ति कहकर संबोधित करना है। गौरतलब है कि जेन-जी जनरेशन ने पिछले दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा आंदोलन किया था। नीट पेपर लीक के विरोध में जेन-जी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ गई थी। आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कुर्सी छोड़नी पड़ी। अब भाजपा इस जेन जी शब्द से परहेज करने लगी है।मंत्री हमारी सुनवाई नहीं करते
बैठक में अलवर उत्तर जिलाध्यक्ष महासिंह चौधरी ने नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई। महासिंह चौधरी ने कहा कि उन्होंने निकाय में पोस्टेड एक ईओ को हटाने के लिए कहा था, लेकिन मंत्री जी ने हमारी सुनवाई नहीं की। जब मंत्री जी की शिकायत हुई तब मंत्री झाबर सिंह खर्रा वहीं बैठक में उपस्थित थे। केवल महासिंह चौधरी ने नहीं बल्कि कई पदाधिकारियों ने मंत्री खर्रा की शिकायत की।अभी तक जमे हैं कांग्रेस के लगाए अफसर
झुंझुनूं जिले की पिलानी विधानसभा से प्रत्याशी रहे भाजपा नेता राजेश दहिया ने भी यूडीएच विभाग की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े उठाए। दहिया ने कहा कि हमारी पार्टी को सत्ता में आए हुए ढाई साल से ज्यादा का समय हो गया लेकिन अधिकतर निकायों में अभी तक पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लगाए अधिकारी कार्य कर रहे हैं। ज्यादातर अधिकारी कांग्रेस की मानसिकता के हैं। ऐसे में भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बातों को वे अनदेखा करते हैं। दहिया ने निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस की मानसिकता वाले अधिकारियों को हटाने की मांग की। साथ ही निकायों में खाली पड़े रिक्त पदों को जल्द भरने की बात कही।
