वडोदराः 17 साल तक जिनकी जिंदगी 'आईएनएस विराट' जैसे जंगी जहाजों और कड़े अनुशासन के बीच बीती, आज वो बिल्कुल अलग अवतार में हैं। पूर्व नेवी अफसर प्रवीण तुलपुले ने हमेशा दुश्मनों से लड़ना सीखा।
लेकिन 60 की उम्र पार कर चुके प्रवीण आज जोकर के बड़े जूते पहन और जादू का सामान लेकर अस्पताल के वॉर्ड में जाते हैं, तो खुद को 'हैपी... द मेडिकल क्लाउन' कहते हैं। प्रवीण के लिए यह सफर मुश्किल, लेकिन सुकून देने वाला है।
हाल ही में प्रवीण अपने पहले वडोदरा टूर पर थे। शनिवार को उन्होंने 'पाठशाला' और 'माइंड जिम' में परफॉर्मेंस दी। रविवार को 'त्रिवेणी' और 'योगनिकेतन' में पैरंट्स व टीचर्स के लिए 'इमोशनल वेलबीइंग' पर वर्कशॉप की। आर्टिस्ट पी.एस. चारी ने बताया कि शो में मजदूरों के बच्चों को खासतौर पर बुलाया था।
'हंसी शायद बीमारी ठीक न करे, लेकिन डर जरूर कम कर देती है'
- कैंसर से जूझते एक बच्चे की आखिरी ख्वाहिश ने उन्हें 'जोकर' बनने की प्रेरणा दी
- प्रवीण अब तक देश के पांच हजार शोज अस्पतालों और अनाथालयों में कर चुके हैं
इसी घटना से जिंदगी बदली। साल 2000 में नेवी से रिटायरमेंट लेकर प्रवीण 'मेडिकल क्लाउन' बन गए। पैच एडम्स से प्रेरित होकर लोग उन्हें 'इंडिया का पैच एडम्स' बुलाते हैं। 'मिशन हैप्पीनेस' के जरिए वह अस्पतालों और अनाथालयों में 5,000 शोज कर चुके हैं। वह 'टॉयबैंक' से जुड़े हैं और केईएम के छात्रों को हंसी से इलाज सिखाते हैं।
कई रोल, पर जोकर वाली पहचान सबसे खास

