Loan Guarantor: आजकल बैंक आसानी से लोन दे देते हैं। तभी तो नौकरी की शुरुआत में ही लोग लोन लेकर मकान खरीद लेते हैं। लोन लेकर महंगी और बड़ी कार खरीद लेते हैं। घर-गृहस्थी जमाने के लिए लोन लेकर घरेलू साजो-सामान खरीद लेते हैं।
अब तो लोन लेकर लोग विदेश की सैर भी करने लगे हैं। यूं तो बैंकों ने अब अधिकतर लोन में गारंटर लेना बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी कुछ बड़े लोन के अकाउंट में गारंटर खोजा जाता है।
Loan Guarantee: बैंक से लोन आपने कभी लिया होगा तो आप जानते होंगे कि कुछ लोन तभी पास होता है जब आप कोई गारंटर ढूंढ के रखते हैं। गारंटर आपके लोन के आवेदन पर हस्ताक्षर कर गारंटी देता है और लोन पास हो गया। यहां सवाल उठता है कि लोन लेने वाला व्यक्ति यदि उधार समय पर नहीं चुकाया तो गारंटर की क्या जिम्मेदारी बनती है? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) राजेश कुमार चौरसिया बता रहे हैं गारंटर बनने के जोखिम के बारे में...गारंटर बनना एक जिम्मेदारी

बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से लोन लेना और किसी के लिए गारंटर बनना एक वित्तीय जिम्मेदारी है। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के लोन के लिए गारंटर बन जाते हैं। लेकिन जब उधार लेने वाला समय पर लोन का रिपेमेंट करने में असमर्थ होता है, तो बैंक उसे डिफॉल्टर घोषित कर देता है।
गारंटर बनने के कुछ रिस्क

जब लोन लेने लेने वाला तीन ईएमआई का भुगतान समय पर नहीं करता है तो बैंक उसे डिफॉल्टर घोषित कर सकता है। ऐसी स्थिति में, उधार लेने वाले के साथ-साथ गारंटर को भी वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसने लोन चुकाने की जिम्मेदारी कागजों पर ली है। इसलिए गारंटर बनने से पहले सावधानीपूर्वक सोच-विचार करना आवश्यक है। इसके संभावित जोखिमों को समझना महत्वपूर्ण है।
सिबिल स्कोर होगा खराब

बैंक का कोई लोन अकाउंट जब डिफॉल्ट करता है तो सबसे पहले बैंक सिबिल को जानकारी देता है। वह जो जानकारी देगा, उसमें उधार लेने वाले के पैन नंबर के साथ गारंटर का पैन नंबर भी रहता है। मतलब कि कोई लोन अकाउंट डिफॉल्ट होता है तो गारंटर का भी क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है। इसके बाद गारंटर को भी उस बैंक क्या, किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन नहीं मिलेगा।
आपसे भी हो सकती है वसूली

बैंक का लोन अकाउंट डिफॉल्ट होता है तो पहले वह मूल उधारकर्ता की संपत्ति जब्त कर पैसा वसूल करने का प्रयास करता है। यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो बैंक के पास अधिकार है कि वह गारंटर की संपत्ति को जब्त करे या उससे रकम और ब्याज की वसूली करे। कागज पर तो गारंटर को पहले ही डिफॉल्ट घोषित कर दिया जाता है।
बैंक कानूनी रूप से है हकदार

जब कोई व्यक्ति किसी लोन अकाउंट में गारंटर बनता है तो वह लोन के आवेदन पर भी हस्ताक्षर करता है। उसी समय बैंक और गारंटर के बीच एक समझौता होता है। जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यदि लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर बकाये का भुगतान नहीं करता है, तो गारंटर को बकाया राशि ब्याज सहित चुकानी होगी। ऐसी स्थिति में, बैंक कानूनी रूप से गारंटर से लोन वसूल करने का हकदार होता है।
गारंटर तभी बनें

किसी भी लोन अकाउंट का गारंटर बनने से पहले आप कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें। सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करें कि आप जिनके गारंटर बन रहे हैं, उस व्यक्ति को अच्छी तरह जानते हैं। हस्ताक्षर करने से पहले आप उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त करें। यह भी जरूरी है कि उस व्यक्ति ने पहले किसी लोन पर डिफॉल्ट नहीं किया हो। उचित जांच-पड़ताल के बाद ही आप गारंटी देने का फैसला लें।

