सुनील सोनकर, मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में शनिवार को उस समय तनाव फैल गया, जब लक्ष्मणपुरी इलाके करीब 200 वर्ष पुराने कब्रिस्तान परिसर में बने नमाज स्थल को प्रशासन ने अतिक्रमण बताते हुए ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के तुरंत बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए और मसूरी-देहरादून हाइवे पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ देर तक हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस और प्रशासन ने किसी तरह रास्ता साफ कराया।
एक ओर प्रशासन इसे पूरी तरह कानूनी कार्रवाई बता रहा है, दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय इसे अपनी धार्मिक भावनाओं पर चोट और सालों पुरानी परंपरा को खत्म करने का आरोप लगा रहा है।
'यह मस्जिद नहीं, अंतिम नमाज का स्थल था'
समुदाय के लोगों ने सवाल उठाया कि यदि भूमि सरकारी थी तो इतने सालों तक किसी प्रशासन ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में प्रशासन को पहले संवाद और सहमति का रास्ता अपनाना चाहिए था।
हाईवे पर प्रदर्शन, भारी पुलिस बल तैनात
प्रशासन का पक्ष: तीन नोटिस के बाद हुई कार्रवाई
एसडीएम ने बताया कि संबंधित पक्ष को तीन बार नोटिस जारी कर स्वेच्छा से संरचना हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नोटिसों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस बल की मौजूदगी में नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। एसडीएम ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है।
फिलहाल हालात नियंत्रण में

