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माया सभ्यता के मंदिर बने अजूबा, हजारों साल से भूकंप और बारिश का क्‍यों असर नहीं? खुला राज

माया सभ्यता के मंदिर बने अजूबा, हजारों साल से भूकंप और बारिश का क्‍यों असर नहीं? खुला राज

ग्वाटेमाला: उत्तरी ग्वाटेमाला के घने जंगलों में ऊंचे खड़े टिकल के मंदिर, भारी बारिश और बार-बार भूकंपों के बावजूद हजारों साल से टिके हैं। समय के साथ इनके कुछ ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं लेकिन कई विशाल इमारतें आज भी अच्छी हालत में हैं।

माया सभ्या के समय बने इन भवनों की लंबी उम्र ने पुरातत्वविदों और मटीरियल साइंटिस्ट को हैरान किया है। वे यह पता लगा रहे हैं कि माया सभ्यता के लोगों के निर्माण मटीरियल और तौर-तरीकों ने कैसे ऐसी इमारतें बनाने में मदद की, जो सदियों तक टिकी हैं।

साइंस एडवांसेज में पब्लिश रिसर्च के अनुसार, माया बिल्डरों ने जले हुए चूना पत्थर को स्थानीय पौधों के अर्क के साथ मिलाकर टिकाऊ प्लास्टर बनाया। पेड़ की छाल के ऑर्गेनिक कंपाउंड चूने के सख्त होने पर उसके मिनरल स्ट्रक्चर में मिल जाते थे। इससे बहुत मजबूत प्लास्टर बनता था, जो दरार पड़ने और मौसम की मार झेलने में बेहतर था। पौधों के अर्क ने कैल्साइट क्रिस्टल के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे मटीरियल को लंबे समय चलने वाली मजबूती मिली।

माया सभ्यता की कारीगरी

शोधकर्ताओं का कहना है कि माया लोग बेहतरीन कारीगरी पर भरोसा करते थे। चूना पत्थर के ब्लॉक को एक-दूसरे के साथ बारीकी से फिट करने के लिए काटा जाता था, जिससे दीवारों के गैप कम हो जाते थे, जबकि मोटी चिनाई विशाल मंदिरों का वजन बांटती थी। पुरातात्विक सबूत बताते हैं कि महत्वपूर्ण इमारतों की नियमित रूप से मरम्मत और मजबूती दी जाती थी, जिससे वे पीढ़ियों तक स्थिर रहीं।

ग्वाटेमाला एक ऐसे भूवैज्ञानिक रूप से सक्रिय क्षेत्र में स्थित है, जहां कैरिबियन, उत्तरी अमेरिकी और कोकोस टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। हालांकि टिकल इनमें से किसी भी फॉल्ट (दरार) के पास नहीं है लेकिन इस क्षेत्र के इतिहास में भूकंप आम रहे हैं। बारिश और वनस्पति ने भी कटाव और खराबी में योगदान दिया है।

चूना कैसे बना मजबूत

जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने रियो बेक और अन्य पुरातात्विक स्थलों से माया मोर्टार का विश्लेषण किया और सिलिका-युक्त एल्यूमीनियम-समृद्ध कणों की पहचान की, जिन्होंने चूने के साथ प्रतिक्रिया करके पॉजोलैनिक कंपाउंड (जैसे कैल्शियम सिलिकेट हाइड्रेट) बनाए।

इन रासायनिक प्रतिक्रियाओं ने कुछ मोर्टार को सघन संरचना विकसित करने और मजबूती बढ़ाने में मदद की, खासकर नमी से होने वाली खराबी को रोका। माया स्मारकों का लंबे समय तक टिके रहना उनके निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्रियों की खासियत को दिखाता है और आर्किटेक्चरल डिजाइन, मरम्मत और देखभाल को भी दर्शाता है।

वैज्ञानिकों की बढ़ी दिलचस्पी

इस अध्ययन में मटीरियल साइंटिस्ट्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। शोधकर्ता पता लगा रहे हैं कि प्राचीन माया चूने के प्लास्टर में इस्तेमाल किए गए प्राकृतिक एडिटिव्स (मिलाए जाने वाले पदार्थ) ने उनकी मजबूती पर कैसा असर डाला और क्या इन जानकारियों से ज्यादा टिकाऊ निर्माण सामग्री बनाने में मदद मिल सकती है।

इन तकनीकों से आधुनिक सीमेंट की जगह लेने की संभावना कम है लेकिन ये कुछ कामों में चूना-आधारित सामग्रियों की परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए आइडिया दे सकती है। माया लोगों ने ये सामग्रियां बिना आधुनिक केमिस्ट्री या इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर के बनाईं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों और पीढ़ियों से चले आ रहे अवलोकन और प्रयोगों से बेहतर बनाई गई निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल किया।
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