लखनऊ: यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। सपा विधायकों ने जब राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया तो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भड़क गए। उन्होंने कहा कि जिन सपा विधायकों ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया हो, वे रसीद दिखाएं।
उनके इस बयान का विपक्षी नेताओं ने विरोध जताया है। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि अगर उसूल एक है, तो सब पर बराबर लागू होना चाहिए।
ओवैसी ने अपने X अकाउंट अकाउंट पर लिखा है- 'अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे सतीश महानायह कहें कि जिन्होंने राम मंदिर का विरोध किया, अगर उन्होंने चंदा दिया है तो रसीद दिखाएं, तब देखेंगे कि उनका पैसा चोरी हुआ या नहीं, तो सवाल सिर्फ़ एक बयान का नहीं, बल्कि विधानसभा की गरिमा का है। क्या अब कोई चुनी हुई विधानसभा का सदस्य अपनी आस्था के आधार पर चोरी को चोरी भी नहीं कह सकता? क्या अब हत्या को हत्या, डकैती को डकैती कहने से पहले लोगों को अपने मज़हब का हलफनामा देना होगा?'
'तीन तलाक पर कानून बनाने का अधिकार कैसे?'
एआईएमआईएम चीफ ने सवाल उठाया- 'फिर यही उसूल वक्फ बोर्डों पर क्यों लागू नहीं होता, जहां गैर-मुस्लिमों को जबरन शामिल किया जाता है? हिंदू एंडोमेंट बोर्डों को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा औक़ाफ़ को क्यों नहीं? और जिस पार्टी का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है, उसे तीन तलाक जैसे असंवैधानिक कानून (जो सिर्फ मुसलमानों से जुड़ा है) बनाने का अधिकार कैसे मिल जाता है?'
महाना ने सपा विधायक पर लिया था कड़ा एक्शन
गौरतलब है कि विधानसभा में अध्यक्ष सतीश महाना ने सीएम योगी आदित्यनाथ से जुड़ा पोस्टर दिखाए जाने के बाद सपा विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था। महाना ने यह भी कहा था कि वह उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए पत्र लिखेंगे। दरअसल पोस्टर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर सवाल पूछे गए थे। शोर-शराबे और हंगामे की वजह से सीएम योगी अपना अभिभाषण पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने प्रेस वार्ता कर सपा और कांग्रेस पर जानबूझकर सदन बाधित करने का आरोप लगाया।

