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PK की इनसाइड स्टोरी: अमेठी से बांकीपुर की प्रचंड जीत तक, जब राहुल गांधी के कहने पर यूपी आए थे प्रशांत किशोर

PK की इनसाइड स्टोरी: अमेठी से बांकीपुर की प्रचंड जीत तक, जब राहुल गांधी के कहने पर यूपी आए थे प्रशांत किशोर

डॉ आशीष कुमार त्रिपाठी, अमेठी: प्रशांत किशोर नेबिहार की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के मजबूत किले को ध्वस्त करते हुए एक प्रचंड जीत दर्ज की है।

प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार और इस सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे पार्टी के दिग्गज नेता नितिन नवीन के प्रभाव वाले इस गढ़ में 19,324 मतों के बड़े अंतर से ऐतिहासिक विजय हासिल की है।

लेकिन चुनावी रणनीति से लेकर जनप्रतिनिधि बनने तक का प्रशांत किशोर का यह सफर सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बेहद दिलचस्प और खास अध्याय उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से भी जुड़ा हुआ है।

हेल्थ एक्सपर्ट थे PK

वर्ष 2007-08 के आसपास, राजनीति में कदम रखने और 'इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट' के रूप में पहचान बनाने से बहुत पहले प्रशांत किशोर सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र (Public Health Sector) में एक विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय थे। संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वास्थ्य कार्यक्रमों में काम कर चुके प्रशांत किशोर इसी दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संपर्क में आए थे। राहुल गांधी के साथ जुड़ाव के बाद प्रशांत किशोर को अमेठी के मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल की प्रबंधन और स्वास्थ्य परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई।

अस्पताल में उनके साथ काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार तारकेश्वर मिश्रा और ओटी टेक्नीशियन कल्लू राम याद करते हुए कहते हैं कि प्रशांत किशोर बेहद मिलनसार और कुशल प्रबंधकीय क्षमता के धनी थे। संजय गांधी अस्पताल में करीब 6 महीने से अधिक समय तक काम करने के दौरान ही उनके साथ काम करने वाले लोगों को यह आभास हो गया था कि अपने दूरदर्शी दृष्टिकोण के कारण PK जीवन में कुछ बड़ा करेंगे। अमेठी में इस परियोजना को सफलता से संभालने के बाद वह गुजरात चले गए और उसके बाद का इतिहास जगज़ाहिर है।

रणनीतिकार से जनप्रतिनिधि बनने का सफर

अमेठी से शुरू हुई प्रशांत किशोर की यह यात्रा गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से होते हुए गुजरी। उन्होंने देश के कई बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की और अपनी सफलता का लोहा मनवाया। हालांकि, उनकी मंजिल सिर्फ दूसरों को चुनाव जिताने तक सीमित नहीं थी। उन्होंने सीधे चुनावी राजनीति में उतरने का फैसला किया और 'जन सुराज' अभियान की शुरुआत करते हुए वर्ष 2024 में जन सुराज पार्टी का गठन किया। शुरुआती सियासी झटकों के बावजूद वे अपने अभियान पर डटे रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर PK की प्रचंड जीत बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा संदेश दे रही है।
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