नई दिल्ली: भारतीय रुपया बुधवार को एक महीने के सबसे मजबूत स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को मजबूती मिली। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने के फैसले के बाद रुपये की शुरुआती तेजी कुछ कम हो गई।
रुपया बुधवार को 0.5% की बढ़त के साथ 94.92 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 1 जुलाई के बाद के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, बाद में इसमें कुछ कमजोरी आई और रुपया 95.1175 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह 7 जुलाई के बाद रुपये का सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर है।
सस्ता कच्चा तेल बना बड़ा सहारा
रुपये की मजबूती में सबसे बड़ी भूमिका कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की रही। ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दो कारोबारी सत्रों में 12% से ज्यादा गिर गई थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच करीब पांच महीने से चल रहे युद्ध में कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ना रही।हालांकि, बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर हमला किया, जिसके बाद तेल बाजार में चिंता बढ़ गई। पिछले आठ कारोबारी सत्रों में रुपया करीब 1.4% मजबूत हुआ है। बाजार में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने से भी रुपये को सपोर्ट मिला है।
बढ़ सकती है डॉलर की मांग
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये के 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से ऊपर मजबूत होने पर डॉलर की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में रुपये की तेजी कुछ हद तक सीमित हो सकती है।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक, डॉलर-रुपये की जोड़ी के लिए 94.75 के आसपास सपोर्ट और 95.60 के करीब रेजिस्टेंस है। यानी 94.75 रुपये का स्तर रुपये के लिए अहम सहारा और 95.60 का स्तर एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
डॉलर-रुपये फॉरवर्ड प्रीमियम में भी गिरावट
बुधवार को डॉलर-रुपये के फॉरवर्ड प्रीमियम में भी कमी आई। यह गिरावट मुख्य रूप से स्पॉट मार्केट में रुपये की चाल के अनुरूप रही। एक साल की इंप्लाइड यील्ड 7 बेसिस पॉइंट घटकर 2.79% रह गई। बाजार में अब रुपये की आगे की दिशा के लिए कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की चाल, विदेशी निवेश और आरबीआई की नीतियों पर नजर रहेगी।
