इस्लामाबाद: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने सीधेतौर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को निशाना बनाया है। भुट्टो ने हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुए चुनावों में शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएलएन पर धांधली का इल्जाम लगाया है।
चुनाव में हिंसा और डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए भुट्टों ने कहा कि अब शरीफ सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इससे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर सियासी उथल-पुथल का इशारा मिलता है। शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएलएन सरकार पीपीपी के समर्थन से ही चल रही है। बिलावल के बयान को कई एक्सपर्ट सरकार गिराने की धमकी की तरह देख रहे हैं। ऐसे में आर्मी चीफ असीम मुनीर की भूमिका अहम हो जाती है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बिलावल ने शहबाज शरीफ को निशाने पर लेते हुए कहा कि आपका काउंटडाउन (गिरावट की शुरुआत या उल्टी गिनती) शुरू हो गया है। बिलावल ने पीओके चुनाव में पीएमएलएन की जीत को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने शरीफ सरकार पर हिंसा और पीपीपी को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
हमारे कार्यकर्ताओं को मारा गया: बिलावल
बिलावल भुट्टो ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान उनके पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या की गई। यहां तक कि नेशनल असेंबली के एक पीपीपी मेंबर को गोली मारी गई। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए बल प्रयोग किया और जो भी गलत चीजें हो सकती थीं, वो की गईं।बिलावल ने कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद पीपीपी ने चुनावों में नौ सीटें जीती हैं। उन्होंने कहा कि मीरपुर और मुजफ़्फराबाद की सीट उनकी पार्टी से चुराई गई हैं, जिनको हर हाल में वापस लिया जाएगा क्योंकि पीपीपी कभी भी मैदान नहीं छोड़ती। उन्होंने पीओके में लगातार सक्रिय बने रहने की बात कही है।
इस्लामाबाद में बढ़ेगा तनाव!
पीपीपी और पीएमएलएन के बीच इस तनातनी का असर सीधे-सीधे पाकिस्तान की सरकार पर हो सकता है। पीपीपी अगर समर्थन वापसी का ऐलान करती है तो शहबाज शरीफ के लिए पीएम पद पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी परिस्थिति में ये देखना अहम होगा कि सैन्य नतृत्व किस तरफ चीजों को लेकर जाता है।शहबाज शरीफ को निशाने पर लेने वाले बड़े नेताओं में बिलावल अकेले नहीं है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी बीते हफ्ते कह चुके हैं कि मौजूदा शासन व्यवस्था पूरी तरह नाकाम है और देश की समस्याओं का समाधान करने मेंअक्षम है। नकवी को सेना का करीबी माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के सियासी गलियारों में इस वक्त कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।

