शश या शशक पंचमहापुरुष योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति ऐसा प्रभावशाली व्यक्ति होता है जिसके नीचे नौकर-चाकर काम करते हैं, वह स्वयं नगर अध्यक्ष, प्रसिद्ध नेता, राजा एवं राजातुल्य ऐश्वर्य भोगने वाला जातक होता है।
दूसरे के धन हरण में दक्ष, मातृ भक्त, कृश कटिवाला ऐसा जातक भोगी एवं योगी दोनों ही गुणों को धारण करने वाला राजनीति के दाँव-पेच में कुशल व्यक्ति होता है। इसी बात की पुष्टि करते हुए ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रंथ मानसागरी में कहा गया है,
नाना सेनानिचयनिरतो, दन्तुरश्चापि किञ्चित, धातोर्वादे भवति कुशलः, चञ्चलो लोलनेत्रः।
स्त्रीसंसक्तः परधनहरो, मातृभक्तः सुजंघो, मध्ये क्षामः सुललितमती रन्ध्रवेदी परेषाम्।।
जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में शनि स्वराशि, उच्च राशि अथवा मूल त्रिकोण राशि का होकर केन्द्र स्थान में बैठता है, तो शश या शशक नामक पंचहापुरूष योग बनता है। जन्मपत्री के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम स्थान को केन्द्र की संज्ञा दी गई है। पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगोड़ा, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, गोविंदा, पी.टी. ऊषा को शनिदेव के इसी शश नामक पंचमहापुरुष योग ने सफलता के शिखर पर पहुँचाया है।
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पंचमहापुरुष राजयोग आपकी जन्मपत्री में है या नहीं
आप सर्वप्रथम किसी की भी जन्मपत्री में देखें कि शनि उच्च का है, स्वराशि का है अथवा मूल त्रिकोण का है। इसका आकलन करने के पश्चात् यह देखें कि शनि उच्च का, स्वराशि का अथवा मूल त्रिकोण का होकर केन्द्र में बैठा है नहीं। अगर इस अवस्था में शनि केन्द्र में किसी जन्मपत्री में बैठा मिलता है तो पंचमहापुरुष नामक इस विशेष शशक योग का सृजन होता है।
शनि की मूल त्रिकोण राशि
शनि की मूल त्रिकोण राशि को समझने के लिए ग्रह किस राशि में कितने अंश पर है, का ध्यान रखना अतिआवश्यक है। शनि कुम्भ राशि में 0 अंश से 20 अंश तक होने पर मूल त्रिकोण राशि में स्थित कहलाता है, 20 अंश से उपर शनि कुम्भ राशि में स्वग्रही कहलाता है। जिस प्रकार शनि पंचमहापुरुष राजयोग बनाता है, उसी प्रकार मंगल ग्रह, बुध ग्रह, गुरु ग्रह, शुक्र ग्रह भी पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण करते हैं।

