नई दिल्ली: भारत की पूर्व राजनयिक वीना सीकरी ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अपने देश लौटने की इच्छा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना ने रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जाहिर की है।
सीकरी के अनुसार, शेख हसीना 5 अगस्त को सत्ता से हटाए जाने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित एक सम्मेलन में अपनी वापसी की मंशा पर विस्तार से अपनी बात रखेंगी।
'छात्र आंदोलन नहीं, सुनियोजित सत्ता परिवर्तन था'
वीना सीकरी ने कहा कि 5 अगस्त 2024 कोशेख हसीना को सत्ता से हटाया जाना केवल छात्रों का विद्रोह नहीं था, बल्कि यह सत्ता परिवर्तन का एक बेहद सुनियोजित और बारीकी से तैयार किया गया अभियान था। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और उनके पीछे मुख्य ताकत मानी जाने वाली जमात-ए-इस्लामी की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रही। उन्होंने सवाल उठाया कि बांग्लादेश में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लोकतांत्रिक कैसे कहा जा सकता है।'18 महीनों में अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को नुकसान'
पूर्व राजनयिक ने आरोप लगाया कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद पिछले 18 महीनों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं बढ़ीं और लोकतांत्रिक संस्थाओं का कामकाज भी प्रभावित हुआ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तथाकथित छात्र पार्टी का वास्तविक जनाधार नहीं है और उसे व्यापक राजनीतिक मान्यता प्राप्त नहीं है।UN रिपोर्ट और मानवाधिकार दावों पर सवाल
वीना सीकरी ने मानवाधिकारों को लेकर जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने संबंधी दावे और आंकड़े सही नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घटनाओं और तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट तैयार की। उनके अनुसार, इन रिपोर्टों की निष्पक्षता और तथ्यात्मकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।'अदालत का सामना करना चाहती हैं शेख हसीना'
वीना सीकरी ने कहा कि फिलहाल शेख हसीना भारत में रह रही हैं और उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि शेख हसीना अब बांग्लादेश लौटकर अदालतों का सामना करना चाहती हैं और अपने खिलाफ दिए गए फैसले के खिलाफ अपील करना चाहती हैं। सीकरी ने दावा किया कि जिस अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, वह एक 'कंगारू कोर्ट' थी, जिसे ऐसा फैसला देने का अधिकार नहीं था।'सुलह और लोकतंत्र बहाली का समय'
पूर्व राजनयिक ने कहा कि बांग्लादेश के लिए अब टकराव नहीं बल्कि सुलह का समय है। उन्होंने कहा कि देश की सभी राजनीतिक ताकतों को अपने मतभेद भुलाकर एक साथ आना चाहिए और वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना के लिए काम करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि शेख हसीना देश लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना चाहती हैं, तो लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत उन्हें ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
