नई दिल्ली: रेगुलर बेसिस पर कॉफी पीने से आंतों के माइक्रोबायोम, शरीर की कार्यप्रणाली और मानसिक क्षमताओं में बदलाव हो सकते हैं। यह खुलासा मेडिकल जर्नल नेचर कम्यूनिकेशंस में पब्लिश नई स्टडी में हुआ है।
शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कॉफी का असर केवल कैफीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंत और बेन के बीच मौजूद माइक्रोबायोटा-ट-ब्रेन एक्सिस को भी प्रभावित करता है। यह प्रणाली शरीर और दिमाग के बीच दोतरफा कम्युनिकेशन का काम करती है।
कॉफी नहीं पीने वालों की मेमोरी बेहतर
स्टडी के अनुसार रेगुलर कॉफी पीने वालों की आंतों में कुछ खास बैक्टीरिया, जैसे Cryptobacterium और Eggerthella की मात्रा अधिक पाई गई। इसके साथ ही कुछ महत्वपूर्ण मेटाबोलाइट्स और न्यूरोट्रांसमीटर, खासकर गामा- अमीनोब्यूटिरिक एसिड (GABA), के स्तर में कमी देखी गई। यही नहीं, इस स्टडी में यह भी पाया गया कि कॉफी पीने वाले लोगों आवेगशीलता (Impulsive) और भावनात्मक (Emotional) रिएक्शन अधिक पाए गए, जबकि कॉफी नहीं पीने वालों की मेमोरी बेहतर पाई गई।सिर्फ कैफीन के कारण नहीं पड़ता प्रभाव
रिसर्च में यह भी पाया गया कि कॉफी का सेवन बंद करने पर आंतों के माइक्रोबायोम में हुए कुछ बदलाव वापस सामान्य हो सकते हैं। हालांकि, दोबारा कॉफी शुरू करने पर ये बदलाव फिर तेजी से उभरते हैं और यह प्रभाव केवल कैफीन के कारण नहीं होता। इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने नौ प्रमुख मेटाबोलाइट्स की पहचान की है, जिनमें कैफीन, थियोफिलीन और कुछ फिनोलिक एसिड शामिल हैं। ये तत्व आंतों के बैक्टीरिया और ब्रेन के कामों के बीच संबंध को मजबूत करते हैं।मेंटल एबिलिटी पर नकारात्मक असर
स्टडी के अनुसार कॉफी का असर जटिल और व्यक्ति विशेष पर निर्भर हो सकता है। इसमें कुछ संभावित लाभ हैं, लेकिन कुछ ऐसे प्रभाव भी सामने आए हैं जो व्यवहार और मेंटल एबिलिटी पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित मात्रा में सेवन और व्यक्तिगत सहनशीलता को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि इस विषय पर और रिसर्च की जरूरत है।
