Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Success Story: किताब के पैसे नहीं थे, जॉब के साथ की तैयारी... ताने सुनते-सुनते RAS अफसर बन गईं सपना मौर्या

Success Story: किताब के पैसे नहीं थे, जॉब के साथ की तैयारी... ताने सुनते-सुनते RAS अफसर बन गईं सपना मौर्या

RAS Success Story: राजस्थान के ब्यावर जिले से आने वाली सपना मौर्या ने बचपन से संघर्ष किया है। स्कूल की यूनिफॉर्म नहीं होती थी। अक्सर लोग दान के रूप में उनकी स्कूल फीस भर दिया करते थे।

किताबें खरीदने के पैसे नहीं होते थे। जैसे-तैसे 12वीं क्लास की पढ़ाई पूरी की। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।


RAS Sapna Mourya Success Story: 'कोशिश कर हल निकलेगा, आज नहीं तो कल निकलेगा, अर्जुन के तीर सा सध, मरुस्थल से भी जल निकलेगा...' कवि आनंद परम की इन लाइनों को राजस्थान की बेटी सपना मौर्या ने अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बना लिया। 10 साल की उम्र में मां का आंचल छूट गया। पिता को शराब की लत थी। खेलने-कूदने की उम्र में सपना यह सोच रही थी कि आगे जिंदगी कैसे कटेगी। तब नानी ने सहारा दिया और परवरिश की। लेकिन अभी जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना था। गरीबी देखनी थी। लोगों के ताने भी सुनने थे। सपना ने सब कुछ सहा और आगे बढ़ती गई। आज वे राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में अधिकारी हैं। उनकी सक्सेस स्टोरी संघर्ष, हौसले और दृढ़ संकल्प की जीती-जागती मिसाल है।कभी किताबें खरीदने के भी पैसे नहीं थे

राजस्थान के ब्यावर जिले से आने वाली सपना मौर्या ने बचपन से संघर्ष किया है। स्कूल की यूनिफॉर्म नहीं होती थी। अक्सर लोग दान के रूप में उनकी स्कूल फीस भर दिया करते थे। किताबें खरीदने के पैसे नहीं होते थे। जैसे-तैसे 12वीं क्लास की पढ़ाई पूरी की। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। जहां लड़कियों को सिर्फ 12वीं क्लास तक पढ़ना काफी माना जाता है। वहां सपना ने इंजीनियरिंग करने की ठानी। बीटेक की पढ़ाई पूरी की। लेकिन तब तक हालात और खराब हो गए थे। आगे कुछ भी करने से पहले कमाना जरूरी हो गया।


7-8 हजार की जॉब के साथ की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

बीटेक के बाद सपना ने प्राइवेट जॉब शुरू कर दी। महज 7000 रुपये की सैलरी पर काम करना शुरू किया। लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। उनका लक्ष्य सरकारी नौकरी पाने का था। हालांकि इस वक्त भी RAS एग्जाम उनके लिए दूर की कौड़ी वाली बात थी। क्योंकि उन्होंने सुना था कि इसकी तैयारी सालों-साल चलती है। महंगी किताबें और कोचिंग का बड़ा खर्चा होता है। इसलिए उन्होंने अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रिपरेशन शुरू कर दी।


दिन में जॉब और रात में सरकारी नौकरी की तैयारी

प्राइवेट जॉब में ज्यादा पैसा नहीं था, लेकिन छोड़ नहीं सकती थीं। प्राइवेट जॉब में 7 से 8 हजार हुए, फिर 10, 15 और फिर 20 हजार रुपये मिलने लगे। इसमें भी मुश्किल से खर्चा निकलता था। सपना दिन में प्राइवेट जॉब करती थीं और घर आकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर थीं।


नानी के अचानक जाने से टूट गई थीं सपना

इस दौरान नानी का अचानक देहांत हो गया। एक इंटरव्यू में सपना मौर्या कहती हैं, 'नानी के निधन से बिल्कुल टूट गई। उनका जाना मेरी दुनिया उजड़ने जैसा था। कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं डिप्रेशन में चली गई थी।' तब उनके मामा और मासी ने उन्हें संभाला। उन्होंने बताया कि मामा-मासी ने तब कहा था, ' या तो रो लो या फिर उठकर खड़ी हो जाओ और अपनी कामयाबी से नानी को सच्ची श्रद्धांजलि दो।' इन शब्दों ने सपना को हिम्मत दी। उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी जारी रखने का फैसला किया। मामा-मासी और घर के अन्य सदस्यों ने सरकारी नौकरी के लिए मोटिवेट किया।


RAS Sapna Mourya Success Story 6

सपना ने जॉब छोड़ दी और फुलटाइम प्रिपरेशन का ठान लिया। क्योंकि उन्हें पूरा विश्वास हो चुका था कि उन्हें सरकारी नौकरी पाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'जब 3 जुलाई को नौकरी छोड़कर सरकारी नौकरी की प्रिपरेशन करने की ठानी तो कुछ दोस्तों ने कहा कि अब तैयारी करने आई हो हम लोग कोर्स खत्म करके बैठे हुए हैं। लेकिन मुझे अपनी मेहनत पर विश्वास था। सिर्फ एक सीट चाहिए वो किसी न किसी तरह ले ही लूंगी। फिर 6 से 7 सरकारी विभाग में चयनित हुई।'


6 महीने के अंदर सरकारी नौकरी सीट पर बैठी थी

उन्होंने कहा, '3 जुलाई को नौकरी छोड़ दी। दिसंबर यानी पांच महीने में लग रहा था कि फिर जॉब ज्वॉइन करनी पड़ेगी। क्योंकि रूम का रेंट बढ़ रहा था। फिर से आर्थिक तंगी बढ़ गई। 3 जुलाई को नौकरी छोड़ी और 25 फरवरी को मैं सरकारी नौकरी की सीट पर बैठी थी। जहां 6 महीने में एग्जाम नहीं होते, वहां मैंने एक सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी।' जोधपुर विद्युत विभाग, LDC जूनियर असिस्टेंट, रेलवे में लोको पायलट, पीएचडी स्टेनोग्राफर समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सपना चयनित हुई थीं।


जब नानी को दी सच्ची श्रद्धांजलि

सपना कहती हैं, 'कई सरकारी नौकरी पाने के बाद जब अखबार में नाम आया कि नानी श्रीमति लक्ष्मी देवी जी भट्ट के अथक प्रयासों से... तब मुझे लगा कि हां मैंने अपनी नानी को सच्ची श्रद्धांजलि दे दी। RAS तो बहुत दूर की बात थी। कोचिंग फीस हजारों में होती है, इसलिए उसके बारे में सोच नहीं भी नहीं सकती थी।


3 महीने की तैयारी में निकाला था RAS मेन्स

एक जॉब में रहते हुए आरएएस प्रीलिम्स की तैयारी के लिए टाइम निकाला। तब मेन्स का सिलेबस तक नहीं पता था। लोगों ने फिर मजाक उड़ाया। फिर से नीचे गिराने की कोशिश की और मैंने फिर उठने की कोशिश की। आसपास के लोग कहते थे कि तीन महीने में क्या तैयारी कर लो गी। टाइम और पैसे वेस्ट कर रही है। तेरा क्या सेलेक्शन होगा। तुझे सिलेबस तक नहीं पता। तब एक कोचिंग संस्थान ने बिना फीस तैयारी कराई। तब मेरी सैलरी 12000 रुपये है। प्रोबेशन पूरा होगा तो फीस दे दूंगी। तब उन्होंने बिना फीस तैयारी कराई।

इसके बाद सपना ने 3 महीने की तैयारी में ही RAS Mains निकाला और अधिकारी बनीं। वे वर्तमान में सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी पद पर हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि आप तभी तक हार सकते हैं जब तक आप खुद अपनी हार नहीं मान लेते।

(All Photos Credit: Insta/sapna.mourya.39)


Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: navabharat taims